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उत्तर प्रदेश
एक मकान, कई टैक्स बिल! बरेली में 53 हजार मालिक हैरान
Ashish verma
11 Oct 2026 4:22 PM IST

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Bareilly : बरेली में हाउस टैक्स में छूट पाने के लिए नगर निगम पहुंच रहे भवन स्वामियों को बिलों की गड़बड़ी से जूझना पड़ रहा है। किसी के एक मकान के दो बिल निकल रहे हैं तो किसी भवन के नाम पर तीन अलग-अलग आईडी दर्ज हैं। हर आईडी पर अलग बिल बनने से लोगों के सामने भुगतान को लेकर असमंजस की स्थिति है। एकमुश्त समाधान योजना के दौरान सामने आ रही इस समस्या से करीब 53 हजार भवन स्वामियों की परेशानी बढ़ गई है।
भवन स्वामी पुराने भुगतान की रसीद लेकर नगर निगम पहुंचते हैं, लेकिन रिकॉर्ड देखने पर उन्हें एक ही मकान की अतिरिक्त आईडी होने का पता चलता है। इसके बाद टैक्स जमा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें पहले बिलों की गड़बड़ी दूर कराने की कोशिश करनी पड़ रही है। लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक मकान के नाम पर बने अलग-अलग बिलों में सही बिल कौन-सा है और भुगतान किसके आधार पर किया जाए।
नगर निगम में सामने आ रहे मामलों में एक भवन के लिए दो या तीन आईडी दर्ज होने की जानकारी मिल रही है। प्रत्येक आईडी पर अलग हाउस टैक्स बिल जनरेट हो रहा है। ऐसे में पुरानी रसीद और वर्तमान रिकॉर्ड के बीच स्थिति स्पष्ट कराना भवन स्वामियों के लिए जरूरी हो गया है। अतिरिक्त आईडी को बंद कराने और सही खाते की पहचान कराने के लिए लोगों को नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
एकमुश्त समाधान योजना में शामिल होने के लिए आने वाले लोग अपने बकाये का भुगतान करना चाहते हैं। हालांकि, एक ही मकान के कई बिल सामने आने पर पहले देय राशि को लेकर स्पष्टता की जरूरत पड़ रही है। जब तक सही आईडी और उसके बिल की पहचान नहीं हो जाती, तब तक भवन स्वामी यह तय नहीं कर पा रहे कि कौन-सी राशि उनके मकान के लिए लागू है। इस वजह से छूट का लाभ लेने की प्रक्रिया भी उनके लिए उलझ गई है।
समस्या केवल अलग-अलग बिल मिलने तक सीमित नहीं है। भवन स्वामियों को अतिरिक्त आईडी के निस्तारण का सवाल भी परेशान कर रहा है। उनके सामने यह स्थिति है कि एक बिल के आधार पर भुगतान करने के बाद बाकी आईडी का रिकॉर्ड किस तरह ठीक होगा। यही कारण है कि लोग टैक्स जमा करने से पहले अपने मकान के नाम पर दर्ज सभी आईडी की स्थिति समझना चाहते हैं। पुरानी रसीद इस मिलान में महत्वपूर्ण दस्तावेज बन रही है।
बरेली नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 2.33 लाख भवनों की आईडी दर्ज हैं। इनमें से लगभग एक लाख लोग नियमित रूप से हाउस टैक्स जमा करते हैं। वहीं, पिछले साल केवल 71 हजार भवन स्वामियों ने टैक्स भरा था। रिकॉर्ड में दर्ज आईडी और भुगतान करने वाले भवन स्वामियों के ये आंकड़े अलग-अलग जानकारी देते हैं। कई आईडी वाले मामलों के सामने आने से संबंधित रिकॉर्ड की सही पहचान का महत्व और बढ़ गया है।
एक मकान के नाम पर कई आईडी होने के कारण कुल आईडी की संख्या को सीधे अलग-अलग मकानों की संख्या मानना उचित नहीं होगा। जिन मामलों में दोहरी या तिहरी प्रविष्टियां सामने आ रही हैं, उनमें एक ही भवन अलग-अलग आईडी के तहत दिखाई दे रहा है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि नगर निगम के कुल रिकॉर्ड में ऐसी प्रविष्टियों की संख्या कितनी है और प्रत्येक प्रभावित भवन के लिए कितनी आईडी दर्ज हैं।
नगर निगम की एकमुश्त समाधान योजना 15 अगस्त से शुरू हुई है और 25 दिसंबर तक चलेगी। इसी अवधि में भवन स्वामी बकाया हाउस टैक्स के मामलों को निपटाने के लिए पहुंच रहे हैं। योजना के दौरान वर्ष 2014 से भी पुराने बकायेदारों के मामले सामने आ रहे हैं। पुराने भुगतान और बकाये से जुड़े विवरणों का मिलान करने के बीच कई आईडी वाली परेशानी लोगों के लिए अतिरिक्त बाधा बन गई है।
पुराने बकाये वाले मामलों में रसीद और संबंधित भवन की आईडी का संबंध स्पष्ट होना आवश्यक है। भवन स्वामी अपनी पुरानी रसीद के आधार पर भुगतान का रिकॉर्ड दिखाते हैं, लेकिन उसी मकान के लिए दूसरी आईडी मिलने पर उनके सामने नए सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे मामलों में केवल बिल की रकम देखना पर्याप्त नहीं है। भुगतान किस आईडी में दर्ज हुआ था और वर्तमान बिल किस खाते से बना है, यह स्पष्ट होना भी जरूरी है।
फिलहाल सामने आई जानकारी में अतिरिक्त आईडी बनने की वजह नहीं बताई गई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इन आईडी को बंद करने या बिलों में सुधार के लिए कितना समय लग रहा है। इसलिए गड़बड़ी को किसी विशेष तकनीकी प्रक्रिया या कर्मचारी की भूमिका से जोड़कर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उपलब्ध विवरण के अनुसार, लोगों की परेशानी एक भवन की कई आईडी और उनसे बन रहे अलग-अलग बिलों को लेकर है।
करीब 53 हजार भवन स्वामियों के लिए अब छूट के साथ टैक्स चुकाने से पहले रिकॉर्ड की गड़बड़ी दूर कराना प्रमुख जरूरत बन गया है। वे सही बिल की पहचान और अतिरिक्त आईडी बंद कराने की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। एकमुश्त समाधान योजना के तहत भुगतान करने पहुंचे लोगों को फिलहाल इसी उलझन के कारण नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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