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City मजिस्ट्रेट के फैसले पर आपत्ति, इमरान मसूद ने उठाई प्रक्रिया पर सवाल

Saharanpur सहारनपुर : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर से जुड़े मस्जिद भूमि विवाद को लेकर जिले की सियासत तेज हो गई है। सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के फैसले के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बन गया है। बजरंग दल की ओर से उठाए गए इस मामले को लेकर अब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासनिक फैसले पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यह मामला प्रशासनिक नहीं बल्कि न्यायिक प्रकृति का है। उन्होंने दावा किया कि भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों की सुनवाई न्यायिक अदालतों में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी को इस तरह के मामलों पर फैसला सुनाने की अधिकारिता को लेकर भी सवाल उठते हैं।
मस्जिद के मुतवल्ली यानी प्रबंधक तनवीर अहमद एडवोकेट ने भी फैसले के खिलाफ न्यायालय जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद वह डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत में याचिका दाखिल करेंगे। उनका कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, दो दिन पहले सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर फैसला सुनाया था। अदालत ने 1359 फसली के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि जिस भूमि पर मस्जिद स्थित है, वह कलेक्ट्रेट की सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। इस फैसले के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
बजरंग दल की ओर से लंबे समय से इस भूमि को लेकर दावा किया जा रहा था। संगठन ने प्रशासन के सामने इस मामले को उठाया था। प्रशासनिक स्तर पर हुई सुनवाई के बाद आए फैसले ने अब राजनीतिक बहस को भी जन्म दे दिया है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि भूमि विवाद जैसे मामलों में उचित न्यायिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले को अदालत में चुनौती दी जाएगी।
वहीं, दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, अभी मामला कानूनी प्रक्रिया के दौर में है और आगे की स्थिति न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से फिलहाल फैसले को राजस्व रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर लिया गया निर्णय बताया जा रहा है। वहीं, मस्जिद प्रबंधन पक्ष ने कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
मामले को लेकर सहारनपुर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सभी की नजर अब इस बात पर है कि डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत में दाखिल होने वाली याचिका पर क्या रुख अपनाया जाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।





