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उत्तर प्रदेश
पूजा सामग्री की पैकिंग पर लिखना होगा ‘खाने के लिए नहीं’, उल्लंघन पर कार्रवाई
nidhi
20 Oct 2026 9:39 AM IST

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घी जैसी पैकिंग से नहीं कर सकेंगे भ्रमित
हापुड़: पूजा, हवन और दीपक जलाने के लिए बनाए जाने वाले अखाद्य वसा उत्पादों की बिक्री और पैकिंग को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। ऐसे उत्पाद अब ‘पूजा घी’ के नाम से नहीं बेचे जा सकेंगे। इनके पैकेट पर ‘घी’ शब्द लिखने पर रोक लगाई गई है। साथ ही काले रंग का क्रॉस बनाने और हिंदी तथा अंग्रेजी में मोटे अक्षरों में ‘खाने के लिए नहीं’ लिखना अनिवार्य होगा। निर्देशों का उद्देश्य खाने योग्य घी और अखाद्य पूजा सामग्री के बीच स्पष्ट अंतर करना है।
उपभोक्ताओं का भ्रम दूर करने की कोशिश
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने प्रदेश की संबंधित इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग के अनुसार, कुछ निर्माता वनस्पति, रिफाइंड तेल, सुगंध और अन्य पदार्थों से पूजा के लिए अखाद्य वसा उत्पाद तैयार करते हैं। उनका रंग, गंध और पैकिंग खाने वाले घी जैसी होने से खरीदार भ्रमित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पूजा के लिए खरीदी गई सामग्री का अनजाने में भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने की आशंका रहती है। नई व्यवस्था के तहत पैकेट देखते ही उसकी प्रकृति स्पष्ट होनी चाहिए। केवल छोटे अक्षरों में उपयोग का उल्लेख करने के बजाय चेतावनी को प्रमुखता से दिखाने पर जोर दिया गया है।
काले क्रॉस के साथ स्पष्ट चेतावनी
निर्देशों के अनुसार, अखाद्य उत्पादों के पैकेट पर काले रंग का क्रॉस जरूरी होगा। इसके साथ हिंदी और अंग्रेजी में स्पष्ट चेतावनी लिखनी होगी कि उत्पाद खाने के लिए नहीं है। इससे खरीदने वाले व्यक्ति को उसकी उपयोग श्रेणी समझने में सहायता मिलेगी। यह निर्देश पूजा में इस्तेमाल होने वाले अखाद्य वसा उत्पादों के लिए है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूजा में इस्तेमाल होने वाला हर घी अखाद्य है या खाने योग्य शुद्ध घी से दीपक जलाने पर रोक है। मुख्य विषय उन उत्पादों की पहचान है, जिन्हें भोजन में इस्तेमाल करने के लिए बनाया ही नहीं गया है। उनकी बिक्री खाने वाले घी जैसी पहचान के साथ नहीं की जा सकेगी।
एक ब्रांड नाम से दो श्रेणियां नहीं बिकेंगी
खाद्य घी और पूजा के लिए बनाए गए अखाद्य वसा उत्पाद एक ही ब्रांड नाम से नहीं बेचे जा सकेंगे। निर्माता को दोनों श्रेणियों की पहचान अलग रखनी होगी। इसका उद्देश्य परिचित नाम या मिलती-जुलती पैकिंग देखकर उपभोक्ता के गलत उत्पाद खरीदने की संभावना कम करना है। पैकिंग पर उत्पाद की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट करना भी जरूरी होगा। हापुड़ में जारी निर्देशों के मुताबिक, संबंधित इकाइयों को नियमों का पालन करना होगा। स्थानीय स्तर पर दशहरे के बाद दुकानों की जांच और छापेमारी किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
खाद्य निर्माण परिसरों पर भी नजर
खाद्य घी, तेल और दूसरी खाने की सामग्री बनाने वाली इकाइयों को भी सतर्क किया गया है। उनके निर्माण या पैकिंग परिसर में पैराफिन, मिनरल ऑयल अथवा पूजा सामग्री में इस्तेमाल होने वाले दूसरे रसायन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित उत्पादों का स्टॉक जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा इकाई का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित करने की कार्रवाई भी संभव है। विभाग की सख्ती उत्पाद के नाम तक सीमित नहीं है। निर्माण स्थल, पैकिंग और बाजार में उसकी बिक्री की स्थिति भी निगरानी के दायरे में रहेगी।
बाजार में अनुपालन सुनिश्चित करना चुनौती
निर्देश जारी होने के बावजूद कुछ बाजारों में बिना काले क्रॉस और पर्याप्त चेतावनी वाले पैकेट बिकने की जानकारी सामने आई है। कुशीनगर में भी ऐसे उत्पादों की बिक्री को लेकर सवाल उठे थे। वहां विभागीय अधिकारियों ने तहसील स्तर पर जांच टीमें गठित करने और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की बात कही है। इससे स्पष्ट है कि पैकिंग के निर्देश जारी करने के साथ बाजार में उनका पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। निर्माता से दुकान तक उत्पाद की सही पहचान बनी रहने पर ही उपभोक्ता को खरीदारी के समय आवश्यक जानकारी मिल सकेगी।
खरीदारी करते समय पढ़ें उपयोग के निर्देश
उपभोक्ताओं को पैकेट पर सामग्री का विवरण, निर्माता का नाम, उपयोग संबंधी निर्देश और चेतावनी पढ़नी चाहिए। केवल रंग, खुशबू, तस्वीर या पैकेट के आकार के आधार पर किसी उत्पाद को खाने योग्य घी नहीं समझना चाहिए। खासकर प्रसाद, मिठाई या भोजन बनाने के लिए खरीदारी करते समय उत्पाद की खाद्य श्रेणी स्पष्ट होना जरूरी है। यदि पैकेट पर ‘खाने के लिए नहीं’ लिखा है, तो उसे भोजन में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह काला क्रॉस नहीं होने भर से कोई सामग्री खाने योग्य साबित नहीं होती। अस्पष्ट जानकारी वाले पैकेट के बारे में विक्रेता से पूछना और संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना देना उपयोगी होगा। विभाग के अनुसार, त्योहारों के दौरान गुणवत्ता जांच और निगरानी अभियान जारी रहेगा। संबंधित कारोबारियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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