उत्तर प्रदेश

बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

nidhi
9 Oct 2026 7:34 AM IST
बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी
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कोर्ट में हाजिर नहीं हुए BSA

उत्तर प्रदेश: बेसिक शिक्षा अधिकारी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने के न्यायिक आदेश का मामला सामने आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पुलिस को संबंधित अधिकारी की गिरफ्तारी सुनिश्चित कर न्यायालय के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस आदेश के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश जारी होना न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, गिरफ्तारी का आदेश जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारी किसी अपराध में दोषी सिद्ध हो चुका है। ऐसे आदेश के कारण और कानूनी आधार की पुष्टि संबंधित न्यायालय के आदेश से ही हो सकती है।
मामला मुजफ्फरनगर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार से जुड़ा है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 8 अक्टूबर को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने सीओ सिटी सिद्धार्थ के. मिश्रा को 12 अक्टूबर 2026 को अधिकारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2020 में नई मंडी थाना क्षेत्र में एक महिला के घर में घुसकर मारपीट और हत्या के प्रयास के आरोपों से संबंधित है। मुकदमे में मोनू, कृष्णपाल, सत्यम और बंटू समेत छह लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें दो आरोपियों के परिजनों ने घटना के समय उनके नाबालिग होने का दावा किया था।
आरोपियों की उम्र निर्धारित करने के लिए उनके शैक्षिक दस्तावेजों की जरूरत पड़ी। दोनों आरोपी गुलशन विहार स्थित प्रेरणा जूनियर हाईस्कूल में पढ़ते थे। अदालत ने स्कूल के प्रधानाचार्य को स्थानांतरण प्रमाणपत्र और गवाही के लिए बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार को तलब किया। उन्हें 18 सितंबर को उपस्थित होने के लिए समन दिया गया था। इसके बावजूद वह अदालत नहीं पहुंचे। गुरुवार, 8 अक्टूबर को हुई सुनवाई में भी उनकी अनुपस्थिति के बाद न्यायालय ने गैर-जमानती वारंट जारी करने का निर्णय लिया।
इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बीएसए के खिलाफ वारंट मूल हत्या के प्रयास वाले मुकदमे में आरोपी होने के कारण नहीं, बल्कि गवाही के लिए अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण जारी किया गया है। अब 12 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत के आदेश के अनुपालन के साथ आरोपियों की उम्र से संबंधित शैक्षिक अभिलेख और गवाही की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकेगी।
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