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चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ फिर गैर जमानती वारंट, 2018 के मारपीट मामले में कोर्ट सख्त

Kavita2
3 Oct 2026 9:08 AM IST
चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ फिर गैर जमानती वारंट, 2018 के मारपीट मामले में कोर्ट सख्त
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नई दिल्ली। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें एक पुराने मामले में एक बार फिर बढ़ गई हैं। गाजियाबाद की एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट ने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला वर्ष 2018 में एक युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट और गाली-गलौज किए जाने से जुड़ा है। अदालत की ओर से दोबारा गैर जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।

मामला करीब आठ साल पुराना है। वर्ष 2018 में एक युवक के साथ मारपीट और गाली-गलौज किए जाने के आरोपों को लेकर मामला दर्ज हुआ था। इसी प्रकरण की सुनवाई गाजियाबाद की एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में चल रही है। मामले में चंद्रशेखर आजाद का नाम भी आरोपी के रूप में सामने आया था। अब न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत ने उनके खिलाफ एक बार फिर गैर जमानती वारंट जारी किया है।

अदालत का यह आदेश मामले में चंद्रशेखर आजाद की उपस्थिति सुनिश्चित करने से जुड़ा है। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष पेश कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। हालांकि गैर जमानती वारंट जारी होने का अर्थ किसी व्यक्ति का दोषी साबित होना नहीं है। वर्ष 2018 की घटना से जुड़े आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ही करेगी।

मामले की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जब एक युवक ने मारपीट और गाली-गलौज किए जाने को लेकर शिकायत की थी। आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके बाद प्रकरण अदालत तक पहुंचा। चूंकि चंद्रशेखर आजाद वर्तमान में सांसद हैं, इसलिए मामले की सुनवाई गाजियाबाद की एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में की जा रही है।

एमपी-एमएलए कोर्ट जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित विशेष अदालत है। इसी अदालत में चंद्रशेखर आजाद से संबंधित पुराने मामले की न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। अब उनके खिलाफ दोबारा गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुसार की जाएगी।

चंद्रशेखर आजाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक चर्चित नाम हैं। वह आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष हैं और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। सांसद बनने के बाद उनके खिलाफ पहले से लंबित मामलों की सुनवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी है। गाजियाबाद का यह मामला भी उन्हीं पुराने मामलों में शामिल है।

वर्ष 2018 के जिस प्रकरण में गैर जमानती वारंट जारी किया गया है, उसमें एक युवक के साथ कथित मारपीट और गाली-गलौज के आरोप हैं। आरोपों की सत्यता और मामले में संबंधित लोगों की भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत को करना है। फिलहाल प्रकरण विचाराधीन है और किसी भी आरोपी को अदालत का अंतिम फैसला आने तक दोषी नहीं माना जा सकता।

एक बार फिर गैर जमानती वारंट जारी होने के कारण मामले में कानूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अब संबंधित प्रक्रिया के तहत चंद्रशेखर आजाद की अदालत में पेशी महत्वपूर्ण होगी। अदालत में पेश होने के बाद उनकी ओर से कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट मामले में आगे की सुनवाई करेगी।

गैर जमानती वारंट सामान्य समन या जमानती वारंट की तुलना में अधिक सख्त न्यायिक आदेश माना जाता है। इसका उद्देश्य अदालत के समक्ष संबंधित व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। ऐसे आदेश के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करती हैं।

मामला पुराना होने के बावजूद एक सांसद से जुड़ा होने के कारण अब फिर सुर्खियों में आ गया है। चंद्रशेखर आजाद आजाद समाज पार्टी के प्रमुख होने के साथ नगीना लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ जारी न्यायिक आदेश पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है।

हालांकि पूरे मामले में यह महत्वपूर्ण है कि गैर जमानती वारंट को दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाए। अदालत ने अभी वर्ष 2018 के मारपीट और गाली-गलौज से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने तथा उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही अदालत अंतिम फैसला करेगी।

फिलहाल गाजियाबाद की एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट द्वारा चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एक बार फिर गैर जमानती वारंट जारी किए जाने से आठ साल पुराना मामला फिर चर्चा में है। अब सभी की नजर आगे की सुनवाई और चंद्रशेखर आजाद की अदालत में पेशी पर रहेगी। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया कोर्ट के आदेश के मुताबिक जारी रहेगी।

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