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नो ट्रिपिंग जोन का दावा फेल? सोसायटियों में बिजली संकट और महंगे बिल का दर्द

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की ओर से गाजियाबाद के शहरी क्षेत्र को नो ट्रिपिंग जोन घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि शहरवासियों को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलनी चाहिए, लेकिन जमीनी स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। शहर के कई इलाकों में रोजाना चार से छह घंटे तक बिजली कटौती हो रही है, जिससे लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर ट्रांस हिंडन क्षेत्र की कॉलोनियों और हाईराइज सोसायटियों में देखने को मिल रहा है। यहां रहने वाले लोगों को बिजली संकट के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। बिजली गुल होने पर सोसायटियों में लगे जेनरेटर का सहारा लेना पड़ता है, जिससे बिजली खर्च कई गुना बढ़ जाता है।
लोगों का कहना है कि सामान्य बिजली आपूर्ति के दौरान जहां करीब सात रुपये प्रति यूनिट का भुगतान करना पड़ता है, वहीं जेनरेटर से मिलने वाली बिजली के लिए 17 रुपये से लेकर 28 से 30 रुपये प्रति यूनिट तक चार्ज किया जा रहा है। इस कारण सोसायटी निवासियों का मासिक बिजली खर्च दो से तीन गुना तक बढ़ गया है।
आक्सी होम सोसायटी निवासी राकेश कुमार ने बताया कि पहले बिजली पर हर महीने करीब चार से पांच हजार रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब यही खर्च बढ़कर 12 से 13 हजार रुपये तक पहुंच गया है। वहीं दिल्ली-99 सोसायटी के अमित प्रकाश ने बताया कि कई बार चार से पांच घंटे तक लगातार बिजली कटौती रहती है और कभी-कभी पूरे दिन भी आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके बावजूद विभाग की ओर से 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया जाता है।
गौर करने वाली बात यह है कि जून महीने की तुलना में जुलाई के अंतिम सप्ताह में बिजली की खपत में करीब 400 मेगावाट की कमी आई है। जून में जहां बिजली की मांग करीब 2200 मेगावाट तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह घटकर 1800 से 1900 मेगावाट के बीच रह गई है। इसके बावजूद बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
भोपुरा, टीला मोड और मोहननगर जैसे क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या सबसे अधिक बताई जा रही है। बुधवार को भी ट्रांस हिंडन के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। टीला मोड में 33 केवी लाइन में फाल्ट आने के कारण कृष्ण विहार कुटी, पंचशील और डिफेंस कॉलोनी की बिजली करीब पांच घंटे तक बाधित रही। इसके अलावा राजेंद्र नगर और श्याम पार्क में भी लगभग चार घंटे तक बिजली गुल रही।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल बिजली व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद फाल्ट और कटौती की समस्या बनी रहती है। लोगों का कहना है कि जब शहर को नो ट्रिपिंग जोन घोषित किया गया है तो फिर लगातार बिजली कटौती क्यों हो रही है, इसका जवाब विभाग को देना चाहिए।
वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में ओवरलोडिंग और तकनीकी खराबी के कारण समस्या आ रही है। अधिकारियों के मुताबिक छोटे-छोटे फाल्ट के कारण आपूर्ति प्रभावित होती है। बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का दावा है कि रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति की जा रही है और जल्द ही समस्याओं का समाधान किया जाएगा। हालांकि, लगातार कटौती और बढ़ते बिजली बिलों के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब देखना होगा कि विभाग के सुधार कार्यों का असर जमीन पर कब तक दिखाई देता है और गाजियाबाद के लोगों को वास्तविक रूप से 24 घंटे निर्बाध बिजली कब मिल पाती है।





