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उत्तर प्रदेश
नव निर्माण के नौ वर्ष: उत्तर प्रदेश में हरित ऊर्जा को नई उड़ान, बजट में 2,104 करोड़ रुपए का प्रावधान
SHIDDHANT
11 Feb 2026 9:17 PM IST

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Lucknow लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में स्पष्ट किया कि योगी सरकार प्रदेश को हरित और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए लगभग 2,104 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में दो गुने से अधिक है। यह प्रावधान राज्य की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
राज्य सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022, उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 और उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह लक्ष्य प्रदेश को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रदेश में अब तक 2,815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि नीति निर्माण के साथ-साथ क्रियान्वयन स्तर पर भी सरकार सक्रिय है।
पीएम कुसुम सूर्यघर योजना को प्रदेश में सघन रूप से लागू किया जा रहा है। बजट में इसके लिए 1,500 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गति मिलेगी। अयोध्या और मथुरा सहित 17 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित ढांचे को मजबूत करने का यह प्रयास स्वच्छ ऊर्जा की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 5.20 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ऊर्जा बचत के साथ-साथ सुरक्षा और सुविधाओं में भी सुधार हुआ है।
उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत प्रदेश में 36 सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। इससे अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ईंधन उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिला है। ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने अग्रणी कदम उठाया है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देगी।
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