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- एमसीएच विंग में शिफ्ट...

संत कबीर नगर। जिला संयुक्त चिकित्सालय में संचालित सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी एसएनसीयू को अब 100 बेड के एमसीएच विंग के द्वितीय तल पर स्थानांतरित किया जाएगा। मौजूदा वार्ड में जगह की कमी और दो बार आग लगने की घटनाओं को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। नवजातों के उपचार से जुड़ी इस महत्वपूर्ण इकाई को नए स्थान पर ले जाने के लिए तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानांतरण के बाद व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर ध्यान रहेगा।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमाशंकर सिंह ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। बैठक के बाद उन्होंने एसएनसीयू को नए वार्ड में स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू करने को कहा। फिलहाल यह इकाई जिला अस्पताल परिसर में संचालित हो रही है। यहां उपलब्ध स्थान सीमित होने के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों की आवाजाही में परेशानी आती है। सामान्य दिनों में बनी रहने वाली यह समस्या आपात स्थिति में अधिक गंभीर हो जाती है।
एसएनसीयू में भर्ती नवजातों की देखभाल के लिए पर्याप्त जगह और व्यवस्थित वातावरण का होना महत्वपूर्ण है। उपचार संबंधी उपकरणों, कर्मचारियों की आवाजाही और मरीजों तक समय पर पहुंचने के लिए वार्ड में सहज आवागमन जरूरी होता है। मौजूदा इकाई में जगह कम होने से इन व्यवस्थाओं को सुचारु रखने में कठिनाई सामने आ रही है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने इकाई के लिए एमसीएच विंग के द्वितीय तल का चयन किया है।
वर्तमान एसएनसीयू में दो बार आग लगने की घटनाएं भी स्थानांतरण के निर्णय का प्रमुख कारण बनी हैं। इन घटनाओं के बाद अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कदम उठाने शुरू किए हैं। नवजातों के उपचार वाले वार्ड में किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने की तैयारी विशेष महत्व रखती है। ऐसे में नई जगह पर इकाई स्थापित करते समय उपचार की जरूरतों के साथ सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का समन्वय भी आवश्यक होगा। हालांकि, आग की पिछली घटनाओं के कारणों और नुकसान का विवरण उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल प्रशासन के सामने अब स्थानांतरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की जिम्मेदारी है। एसएनसीयू जैसी इकाई को दूसरी जगह ले जाने का काम केवल बेड बदलने तक सीमित नहीं होता। इसके साथ उपकरणों की स्थापना, बिजली की उपलब्धता, उपचार संबंधी सुविधाओं और कर्मचारियों की कार्यव्यवस्था को भी जोड़कर देखना पड़ता है। नए वार्ड में इन जरूरतों के अनुरूप तैयारी होने पर ही इकाई का संचालन सुचारु रखा जा सकेगा। बैठक में तैयारियां शुरू करने के निर्देश इसी प्रक्रिया का शुरुआती चरण हैं।
एमसीएच विंग के द्वितीय तल पर एसएनसीयू स्थापित होने के बाद मरीजों को वहां तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर दूसरे विभागों में ले जाने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण रहेगी। अस्पताल में नवजातों के साथ उनके परिजन भी मौजूद रहते हैं। इसलिए उपचार क्षेत्र और तीमारदारों की आवाजाही के बीच उचित व्यवस्था बनाना जरूरी होगा। मौजूदा वार्ड में आवागमन की परेशानी को देखते हुए नए स्थान पर रास्तों और प्रवेश व्यवस्था की उपयोगिता इस बदलाव की सफलता में अहम भूमिका निभाएगी।
स्थानांतरण की तैयारियों के दौरान भर्ती नवजातों की देखभाल लगातार बनी रहे, यह सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगा। उपकरणों और अन्य आवश्यक सामग्री को नए वार्ड में व्यवस्थित करने के साथ उपचार सेवाओं की निरंतरता का ध्यान रखना आवश्यक है। अस्पताल प्रशासन ने अभी तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उपलब्ध जानकारी में इकाई को स्थानांतरित करने की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। इसलिए फिलहाल निर्णय और उसकी तैयारी को ही स्पष्ट स्थिति के रूप में देखा जा सकता है।
आग की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर दिया जा रहा ध्यान नए वार्ड की तैयारियों में भी महत्वपूर्ण रहेगा। बिजली से चलने वाले उपकरणों के उपयोग, आपात निकास और जरूरत के समय मरीजों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा अस्पताल संचालन का अहम हिस्सा है। द्वितीय तल पर इकाई होने के कारण आपात परिस्थितियों में आवागमन की तैयारी का महत्व और बढ़ जाता है। इन पहलुओं को ध्यान में रखकर व्यवस्थाएं तैयार करना नवजातों और कर्मचारियों, दोनों के लिए आवश्यक होगा।
मौजूदा वार्ड में सीमित जगह का असर तीमारदारों की सुविधा पर भी पड़ रहा है। अस्पताल आने वाले परिवारों को नवजात के उपचार के दौरान कई तरह की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। ऐसे में भीड़ और संकरे आवागमन क्षेत्र उनकी परेशानी बढ़ा सकते हैं। नई जगह पर इकाई स्थापित करने के निर्णय से इन समस्याओं को कम करने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक सुधार का आकलन नई व्यवस्था शुरू होने और उसके संचालन के बाद ही किया जा सकेगा।
एसएनसीयू का स्थानांतरण जिला संयुक्त चिकित्सालय में नवजात उपचार की व्यवस्था सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीएमएस के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नए वार्ड की तैयारियों पर काम करना है। जगह की कमी दूर करना, आवाजाही आसान बनाना और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना इस निर्णय के प्रमुख आधार हैं। अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि एमसीएच विंग में इकाई के संचालन से पहले आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी हों और नवजातों को उपचार के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।





