उत्तर प्रदेश

शाही जामा मस्जिद को लेकर नया मोड़ पुरातात्विक जांच की मांग से बढ़ी हलचल

Ratna Netam
8 Sept 2026 5:26 PM IST
शाही जामा मस्जिद को लेकर नया मोड़ पुरातात्विक जांच की मांग से बढ़ी हलचल
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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्थित ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद को लेकर नया विवाद सामने आया है। एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने दावा किया है कि मस्जिद के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ, विहार और अन्य पुरातात्विक संरचनाएं मौजूद हो सकती हैं। इस दावे के आधार पर उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से वैज्ञानिक जांच और सर्वे कराने की मांग की है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की संरचना और पुरातात्विक महत्व को लेकर बहस चल रही है। मेरठ की शाही जामा मस्जिद को लेकर उठी इस मांग के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल शुरू हो गई है।
कमिश्नर और डीएम को सौंपा गया ज्ञापन
मेरठ जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने मेरठ मंडल के कमिश्नर और जिलाधिकारी को पत्र देकर शाही जामा मस्जिद परिसर की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अपने ज्ञापन में कई ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुराने संदर्भों का उल्लेख करते हुए ASI सर्वे की जरूरत बताई है।
अधिवक्ता का कहना है कि उपलब्ध ऐतिहासिक संकेतों और पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर यह जांच जरूरी है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका दावा है कि मस्जिद के नीचे प्राचीन बौद्ध काल से जुड़ी संरचनाएं हो सकती हैं।
किन आधारों पर किया गया दावा?
शिकायतकर्ता की ओर से मेरठ जिला गजेटियर-1904, चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा विवरण और क्षेत्र में मौर्य तथा बौद्ध काल से जुड़े ऐतिहासिक संकेतों का हवाला दिया गया है। इसके अलावा कुछ इतिहासकारों द्वारा बताए गए पुराने स्तंभों और अवशेषों का भी जिक्र किया गया है।
कुछ इतिहासकारों ने पहले भी दावा किया था कि शाही जामा मस्जिद के स्थान पर पहले बौद्ध मठ या प्राचीन संरचना मौजूद थी। हालांकि इन दावों को लेकर इतिहासकारों और अन्य पक्षों के बीच मतभेद भी रहे हैं।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
मामले को लेकर मेरठ मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को आवश्यक जांच कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासन उपलब्ध दस्तावेजों, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगा।
हालांकि अभी तक ASI की ओर से किसी औपचारिक सर्वे की घोषणा नहीं की गई है। आगे की प्रक्रिया प्रशासनिक जांच और नियमों के आधार पर तय होगी।
इतिहास को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
भारत में कई ऐतिहासिक इमारतों को लेकर समय-समय पर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में पुरातात्विक जांच और वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए तथ्यों की पुष्टि की जाती है।
मेरठ की शाही जामा मस्जिद भी लंबे समय से ऐतिहासिक महत्व वाली इमारत मानी जाती है। इसके निर्माण, काल और स्थापत्य को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत रहे हैं।
विवाद नहीं, वैज्ञानिक जांच की मांग: अधिवक्ता
राम कुमार शर्मा ने कहा है कि उनकी मांग किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों की वैज्ञानिक जांच कराना और संभावित पुरातात्विक धरोहरों की पहचान करना है। उन्होंने जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी रखने की बात कही है।
उनका कहना है कि यदि जमीन के नीचे कोई प्राचीन संरचना मौजूद है तो उसका संरक्षण किया जाना चाहिए और इतिहास को प्रमाणों के आधार पर सामने लाया जाना चाहिए।
अब ASI सर्वे पर टिकी नजर
फिलहाल मेरठ की शाही जामा मस्जिद को लेकर उठे इस दावे के बाद सभी की नजर प्रशासन और पुरातत्व विभाग के अगले कदम पर है। अगर ASI सर्वे को मंजूरी मिलती है तो वैज्ञानिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि परिसर के नीचे किसी प्राचीन संरचना के प्रमाण मौजूद हैं या नहीं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, पुरातात्विक जांच और इतिहास की व्याख्या को लेकर बहस तेज कर दी है।
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