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उत्तर प्रदेश
संभल बीमा घोटाले में नया मोड़, कुर्क संपत्ति पर अदालत का फैसला
nidhi
10 Oct 2026 8:54 AM IST

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कुर्क संपत्ति बहाली के आदेश पर नजर
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सामने आए करीब 100 करोड़ रुपये के कथित फर्जी बीमा घोटाले से जुड़े मामले में संपत्ति कुर्क किए जाने और आरोपितों को राहत मिलने को लेकर चर्चा तेज है। इस प्रकरण में अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, संपत्ति बहाल करने वाले कथित नए आदेश की प्रति और उसमें दर्ज शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में आदेश का सटीक दायरा और किन आरोपितों को राहत मिली है, इसकी जानकारी आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का मामला
संभल पुलिस ने वर्ष 2025 में एक ऐसे कथित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया था, जिस पर फर्जी बीमा पॉलिसियों और बीमा दावों के जरिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांच के अनुसार, गिरोह मृत, गंभीर रूप से बीमार और अन्य लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसियां तैयार कराकर क्लेम की रकम हासिल करने में शामिल था। इस मामले की जांच का दायरा संभल से आगे कई राज्यों तक फैला। पुलिस ने अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारियां कीं और आरोपितों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए। जांच एजेंसियों ने कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों का पता लगाने के लिए वित्तीय लेनदेन तथा संपत्ति के दस्तावेजों की भी पड़ताल की।
पहले कुर्क की गई थी करोड़ों की संपत्ति
जनवरी 2026 में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, संभल प्रशासन ने कथित बीमा घोटाले के मुख्य आरोपित ओंकारेश्वर मिश्रा और उनके दो सहयोगियों से संबंधित करीब 11.89 करोड़ रुपये की संपत्ति गैंगस्टर कानून के तहत कुर्क की थी। यह कार्रवाई जिलाधिकारी के आदेश पर की गई थी। रिपोर्टों में संपत्तियों का संबंध संभल, बदायूं, गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी से बताया गया था। पुलिस का आरोप था कि इन संपत्तियों को कथित अवैध गतिविधियों से अर्जित धन के माध्यम से बनाया गया था।
अदालत का आदेश क्यों है महत्वपूर्ण?
संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई और उसे बहाल करने का आदेश कानूनी रूप से अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। किसी संपत्ति की कुर्की को चुनौती दिए जाने पर संबंधित अदालत दस्तावेजों, कानूनी प्रावधानों और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर फैसला कर सकती है। यदि अदालत ने किसी संपत्ति की कुर्की हटाने का आदेश दिया है, तो उसके प्रभाव का निर्धारण आदेश में दर्ज कारणों और शर्तों के अनुसार होगा। इसी तरह, किसी आरोपित को जमानत, आरोपमुक्ति या अन्य राहत मिलने का अर्थ अपने आप यह नहीं होता कि उससे जुड़े सभी आपराधिक आरोप समाप्त हो गए हैं।
आगे क्या होगा?
संभल के कथित बीमा घोटाले में संपत्ति बहाल करने संबंधी नए आदेश की प्रति उपलब्ध होने पर ही यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि किन लोगों को राहत मिली, कितनी संपत्ति मुक्त की गई और क्या पुलिस या प्रशासन के पास आगे अपील करने का विकल्प है।फिलहाल, इस मामले में पूर्व में हुई कुर्की और कथित नए अदालती फैसले के बीच संबंध की पुष्टि आवश्यक है। इसलिए अदालत के आदेश की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने तक इसे आरोपितों की पूर्ण कानूनी मुक्ति या पूरे घोटाले का अंत मानना उचित नहीं होगा।
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