उत्तर प्रदेश

मेरठ के चर्चित हत्याकांड में नया मोड़, अब हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

Ratna Netam
24 Oct 2026 9:27 PM IST
मेरठ के चर्चित हत्याकांड में नया मोड़, अब हाई कोर्ट में होगी सुनवाई
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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे 'ब्लू ड्रम केस' के नाम से भी जाना जाता है, में नया कानूनी मोड़ सामने आया है। इस मामले में मौत की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है। दोनों दोषियों ने अपने वकीलों के माध्यम से संयुक्त अपील दाखिल कर दोषसिद्धि और फांसी की सजा को रद्द करने की मांग की है। इस अपील के बाद एक बार फिर यह चर्चित हत्याकांड सुर्खियों में आ गया है।जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष अगले सप्ताह इस मामले की सुनवाई होने की संभावना है। अदालत में दोनों दोषियों की ओर से निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी जाएगी। अब हाई कोर्ट की सुनवाई और आगामी कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
14 अक्टूबर को सुनाई गई थी फांसी की सजा
मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने सजा पर सुनवाई करते हुए 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मौत की सजा सुनाई थी।अदालत ने इस हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए इसे 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी का मामला माना था। भारतीय न्याय व्यवस्था में मौत की सजा को असाधारण परिस्थितियों में दिया जाने वाला दंड माना जाता है।निचली अदालत के इस फैसले के बाद अब दोनों दोषियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उनकी ओर से दाखिल अपील में दोषसिद्धि और सजा, दोनों को चुनौती दी गई है।
मुस्कान और साहिल ने दाखिल की संयुक्त अपील
मिली जानकारी के मुताबिक, मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने अपने अधिवक्ताओं के जरिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में संयुक्त अपील प्रस्तुत की हैइस अपील में दोनों ने मेरठ की अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को निरस्त करने की मांग की है। अब हाई कोर्ट मामले के रिकॉर्ड, साक्ष्यों और निचली अदालत के निर्णय की कानूनी समीक्षा करेगा।हालांकि, अपील में उठाए गए विशिष्ट कानूनी तर्कों की विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि बचाव पक्ष किन प्रमुख आधारों पर निचली अदालत के फैसले को चुनौती देगा।
ब्लू ड्रम केस के नाम से चर्चित हुआ मामला
सौरभ राजपूत हत्याकांड देशभर में उस समय चर्चा का विषय बना था, जब जांच के दौरान एक नीले रंग का ड्रम महत्वपूर्ण सबूत के रूप में सामने आया था।इसी वजह से यह मामला 'ब्लू ड्रम केस' के नाम से पहचाना जाने लगा। इस हत्याकांड ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और जांच से लेकर अदालती कार्यवाही तक मामला चर्चा में बना रहा।निचली अदालत द्वारा दोनों आरोपियों को दोषी ठहराए जाने और मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अब मामला उच्च न्यायालय में पहुंच गया है।
हाई कोर्ट में होगी फैसले की समीक्षा
भारतीय कानूनी व्यवस्था में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद उच्च न्यायालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। कानून के अनुसार, सत्र अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को लागू करने के लिए संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है।इसके अतिरिक्त दोषी व्यक्ति निचली अदालत की दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील भी कर सकता है।हाई कोर्ट मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर सकता है। अदालत के पास निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने, सजा में बदलाव करने या कानून के अनुसार अन्य उचित आदेश पारित करने का अधिकार होता है।
अगले सप्ताह सुनवाई की संभावना
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की संयुक्त अपील पर अगले सप्ताह इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई होने की उम्मीद है।इस दौरान अदालत के सामने निचली अदालत का फैसला और अपील से संबंधित कानूनी पहलू रखे जाएंगे। सुनवाई की निश्चित तारीख और आगे की प्रक्रिया अदालत के आदेशों के अनुसार स्पष्ट होगी।फिलहाल दोनों दोषियों की ओर से दाखिल अपील के कारण सौरभ राजपूत हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत के फैसले पर क्या निर्णय देता है।
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