उत्तर प्रदेश

17.29 करोड़ के जाली नोट मामले में नया मोड़ 11 हजार वेतन वाला कर्मचारी जांच के केंद्र में

Kavita2
12 Sept 2026 10:03 AM IST
17.29 करोड़ के जाली नोट मामले में नया मोड़ 11 हजार वेतन वाला कर्मचारी जांच के केंद्र में
x

सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के कथित जाली नोट बरामद होने के मामले में एक संविदा कर्मचारी की भूमिका जांच के केंद्र में आ गई है। यह कर्मचारी बैंक में ड्राइवर-लोडर के पद पर काम करता है और उसका मासिक वेतन लगभग 11 हजार रुपये बताया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की पड़ताल में अब उससे जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, जांच के दायरे में आने का अर्थ किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध होना नहीं है।

इस मामले में कर्मचारी की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रकाशित समाचार के अनुसार, उसके पास पांच मकान, एक एसयूवी, एक सेडान कार और दो मोटरसाइकिल होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में उसकी आय, संपत्तियों और करेंसी चेस्ट मैनेजर से संबंधों की जांच का उल्लेख है। हालांकि, संपत्तियों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और कर्मचारी का विस्तृत जवाब उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन दावों को जांच से जुड़े विवरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

बैंक के करेंसी चेस्ट से इतनी बड़ी राशि के कथित नकली नोट मिलने का मामला कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखता है। सबसे प्रमुख सवाल है कि ये नोट वहां तक कैसे पहुंचे और उनकी मौजूदगी का पता किस चरण में चला। नोटों के स्रोत, उनकी आवाजाही और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होना जांच के लिए महत्वपूर्ण होगा। उपलब्ध जानकारी में इस पूरी प्रक्रिया की समयरेखा नहीं दी गई है। इसलिए किसी खास व्यक्ति या तरीके को बरामदगी के लिए जिम्मेदार बताना अभी संभव नहीं है।

संविदा कर्मचारी की नियुक्ति ड्राइवर-लोडर के रूप में बताई गई है। ऐसे में उसकी निर्धारित जिम्मेदारियां, वास्तविक कामकाज और करेंसी चेस्ट तक पहुंच से जुड़े विवरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं। केवल पदनाम से यह तय नहीं होता कि उसे दैनिक कार्यों में कितनी जिम्मेदारी दी गई थी। संबंधित अनुबंध और कार्यालयीय अभिलेखों से इस विषय पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में उसकी नियुक्ति की अवधि, ड्यूटी का पूरा विवरण या अधिकारों की सूची शामिल नहीं है।

कर्मचारी के मासिक वेतन और बताई गई संपत्तियों के बीच अंतर ने इस प्रकरण को चर्चा में ला दिया है। लेकिन किसी व्यक्ति की कुल आर्थिक स्थिति समझने के लिए केवल नौकरी का वेतन पर्याप्त आधार नहीं होता। संपत्तियों की खरीद की तारीख, अन्य आय, पारिवारिक संसाधन और वित्तीय अभिलेख भी महत्वपूर्ण होते हैं। यहां इन विषयों का विस्तृत विवरण सामने नहीं है। इसलिए संपत्तियों को अवैध कमाई का परिणाम बताने के बजाय उनके स्रोत से संबंधित प्रमाणित जानकारी का इंतजार जरूरी है।

जांच के दौरान बैंक के कामकाज से जुड़े रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे। नकदी की प्राप्ति, उसके रखरखाव और अभिलेखों के मिलान से घटनाक्रम की कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष रिकॉर्ड की जांच पूरी होने या किसी प्रक्रिया में कमी सिद्ध होने का उल्लेख नहीं है। इसी कारण बैंक की सुरक्षा व्यवस्था में निश्चित खामी का दावा नहीं किया जा सकता। यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित जाली नोट किस परिस्थिति में करेंसी चेस्ट में मौजूद थे।

मामले में गिरफ्तारी का एक अलग घटनाक्रम भी सामने आया था। प्रकाशित समाचार के अनुसार, एनआईए ने मंगलवार को कथित जाली नोटों की बरामदगी से जुड़े एक प्रमुख आरोपी बैंक कर्मचारी को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी को जांच के केंद्र में आए संविदा ड्राइवर-लोडर की गिरफ्तारी नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्ध विवरण दोनों की पहचान एक बताने का आधार नहीं देता। प्रकरण में अलग-अलग व्यक्तियों की भूमिका और उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट रखना महत्वपूर्ण है।

बरामद नोटों से संबंधित तकनीकी विवरण भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। नोट किस मूल्यवर्ग के थे, उनकी पहचान किस प्रक्रिया से हुई और परीक्षण में क्या निष्कर्ष सामने आए, इन प्रश्नों का विस्तृत उत्तर नहीं दिया गया है। इसलिए नोटों की बनावट या उन्हें तैयार करने की तकनीक पर निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा। इसी तरह किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क या बाहरी गिरोह की संलिप्तता की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसी संभावनाओं को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इस नए पहलू पर संविदा कर्मचारी का पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा। उसके बारे में सामने आए दावों पर उसका विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है। बैंक की ओर से उसकी भूमिका और कार्यक्षेत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया भी दिए गए विवरण में शामिल नहीं है। जांच में उठे सवालों का उत्तर संबंधित दस्तावेजों और बयानों से मिल सकेगा। तब तक कर्मचारी को पूरे मामले का सूत्रधार बताना या कथित जाली नोटों की मौजूदगी के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराना उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा।

सहारनपुर के पीएनबी करेंसी चेस्ट से जुड़ी पड़ताल में अब संविदा कर्मचारी की भूमिका नया महत्वपूर्ण विषय है। 17.29 करोड़ रुपये के कथित जाली नोटों की बरामदगी के साथ उसकी नौकरी और आर्थिक स्थिति से जुड़े सवाल चर्चा में हैं। आगे जांच एजेंसी की आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगा कि कर्मचारी की भूमिका क्या थी और नोटों के स्रोत से संबंधित कौन-से तथ्य सामने आए। फिलहाल मामला जांच के चरण में है और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।

Next Story