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देशी गायों को बढ़ावा देने के लिए नई योजना: डेयरी खोलने पर 50% तक अनुदान

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: देश में स्वदेशी गायों की नस्लों को बढ़ावा देने और दुग्ध उत्पादन को मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से नई पहल शुरू की गई है। इसके तहत देशी गायों की डेयरी स्थापित करने पर पशुपालकों को 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य स्वदेशी नस्लों की संख्या बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है।
योजना के अंतर्गत गीर, साहीवाल और थारपारकर जैसी प्रमुख स्वदेशी नस्लों को प्राथमिकता दी जा रही है। इन नस्लों की गायों को पालने के लिए किसानों के साथ-साथ अन्य इच्छुक लोग भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए पशुपालन विभाग ने आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस योजना से जुड़ सकें।
इस पहल के तहत नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत मिनी नंदिनी समृद्धि योजना चलाई जा रही है। इस योजना के माध्यम से विशेष रूप से गीर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की गायों को पालने पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। यह योजना दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने और आधुनिक डेयरी मॉडल को ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, इस योजना में 10 गायों की एक यूनिट मानी गई है। एक यूनिट की अनुमानित लागत 23 लाख 60 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इस लागत पर पात्र लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे डेयरी स्थापित करना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा।
इसके अलावा कुछ अन्य श्रेणियों में 40 प्रतिशत तक का अनुदान भी दिया जाएगा, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के पशुपालकों को भी लाभ मिल सके। सरकार का मानना है कि इस तरह की योजनाओं से ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पलायन की समस्या में भी कमी आएगी।
पशुपालन विभाग के अनुसार, योजना का मुख्य उद्देश्य देशी नस्लों की घटती संख्या को रोकना और उन्हें संरक्षित करना है। विदेशी नस्लों की तुलना में देशी गायें भारतीय जलवायु के अनुकूल होती हैं और कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि साहीवाल, गीर और थारपारकर जैसी नस्लें उच्च गुणवत्ता वाला दूध देने के लिए जानी जाती हैं। इन नस्लों का दूध न केवल पोषण से भरपूर होता है, बल्कि इससे बने उत्पादों की बाजार में भी अच्छी मांग रहती है। इसी कारण सरकार इन नस्लों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई किसान और पशुपालक इसे एक लाभकारी अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि अनुदान समय पर और सरल प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराया गया तो डेयरी क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पशुपालन विभाग ने बताया है कि आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग योजना का लाभ उठा सकें। आवेदन करने वाले लाभार्थियों का चयन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में देश में स्वदेशी गायों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाई पर पहुंचाया जा सके। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को भी मजबूत किया जा सके।
इस योजना को ‘श्वेत क्रांति’ के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें न केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है, बल्कि पशुपालकों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।





