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KGMU धर्मांतरण केस में नया खुलासा, छात्राओं को उकसाने का आरोप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले में जांच के दौरान नए आरोप सामने आए हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और पुलिस की जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया है कि मेडिकल छात्राओं को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने के उद्देश्य से बॉलीवुड की हिंदू-मुस्लिम जोड़ियों का उदाहरण दिया जाता था। आरोप है कि इन जोड़ियों को आदर्श बताकर छात्राओं की सोच बदलने और उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जाती थी। इस मामले में रेजिडेंट डॉक्टर रमीज और इस्लाम से जुड़ी एक जूनियर रेजिडेंट (जेआर) की भूमिका जांच के दायरे में है। पीड़िताओं के बयानों के आधार पर एसटीएफ अब इन आरोपों से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी है।
जानकारी के मुताबिक, केजीएमयू में कथित धर्मांतरण गतिविधियों की जांच कर रही एसटीएफ और पुलिस को पीड़ित छात्राओं के बयानों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने के उद्देश्य से अलग-अलग तरीके अपनाए जाते थे। इनमें फिल्मी दुनिया की चर्चित हिंदू-मुस्लिम जोड़ियों का उदाहरण देना भी शामिल था। आरोप है कि इन जोड़ियों को रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर यह समझाने की कोशिश की जाती थी कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच रिश्ते सामान्य हैं और धर्म परिवर्तन को लेकर किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, अलग-अलग धर्मों के व्यक्तियों के बीच विवाह करना या ऐसे रिश्तों का उदाहरण देना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। जांच का मुख्य विषय यह है कि क्या इन उदाहरणों के माध्यम से छात्राओं पर धर्म परिवर्तन के लिए अनुचित दबाव बनाया गया या उन्हें किसी तरह से प्रभावित करने का संगठित प्रयास किया गया।
मामले में रेजिडेंट डॉक्टर रमीज का नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां उनकी कथित भूमिका से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही एक जूनियर रेजिडेंट की भूमिका को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि पीड़िताओं ने अपने बयानों में इस संबंध में जानकारी दी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि छात्राओं से किस तरह की बातचीत की जाती थी और क्या इसके पीछे कोई सुनियोजित गतिविधि थी।
एसटीएफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीड़िताओं के बयानों की पुष्टि करने वाले स्वतंत्र साक्ष्य जुटाना है। जांच के दौरान यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि कथित बातचीत किन परिस्थितियों में हुई, उसमें कौन-कौन शामिल था और क्या वास्तव में छात्राओं को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया गया था। इसके लिए जांच एजेंसियां उपलब्ध जानकारियों का मिलान कर रही हैं।
पीड़िताओं के बयानों में बॉलीवुड की हिंदू-मुस्लिम जोड़ियों का जिक्र सामने आने के बाद जांच का यह पहलू महत्वपूर्ण हो गया है। आरोप है कि छात्राओं को समझाने के दौरान फिल्मी हस्तियों के व्यक्तिगत जीवन और उनके रिश्तों का हवाला दिया जाता था। इस तरह की बातचीत के पीछे क्या उद्देश्य था, इसकी पुष्टि अभी जांच के माध्यम से होनी बाकी है।
मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में इस प्रकार के आरोप सामने आना गंभीर विषय माना जा रहा है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र-छात्राएं मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। ऐसे में शैक्षणिक वातावरण में किसी भी तरह के कथित धार्मिक दबाव या अनुचित प्रभाव की शिकायत की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जांच एजेंसियों के सामने यह भी सवाल है कि यदि ऐसी गतिविधियां हुईं, तो उनका दायरा कितना था और क्या अन्य छात्राओं के साथ भी इसी प्रकार की बातचीत की गई थी।
मामले में पीड़िताओं के बयान जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं। एसटीएफ और पुलिस इन बयानों में सामने आए तथ्यों की पुष्टि करने का प्रयास कर रही हैं। जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति की भूमिका तय करने के लिए केवल आरोप पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि उनके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य भी आवश्यक होंगे।
कथित धर्मांतरण मामले में जांच एजेंसियां यह भी स्पष्ट करने का प्रयास कर रही हैं कि छात्राओं के साथ हुई बातचीत सामान्य व्यक्तिगत चर्चा तक सीमित थी या इसके पीछे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का कोई विशेष उद्देश्य था। यह अंतर कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति का धार्मिक विश्वास रखना, उसके बारे में चर्चा करना या अंतरधार्मिक विवाह का समर्थन करना और किसी को अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य करना अलग-अलग विषय हैं।
उत्तर प्रदेश में गैरकानूनी धर्म परिवर्तन से संबंधित मामलों के लिए विशेष कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे मामलों में धोखाधड़ी, प्रलोभन, दबाव या अन्य प्रतिबंधित तरीकों से धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों की जांच की जाती है। हालांकि, केजीएमयू के इस मामले में किन आरोपों की पुष्टि होती है और किन कानूनी प्रावधानों का प्रयोग किया जाएगा, यह जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
रेजिडेंट डॉक्टर रमीज और संबंधित जूनियर रेजिडेंट के खिलाफ सामने आए आरोपों को लेकर फिलहाल जांच एजेंसियां साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया में जुटी हैं। आरोपों की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और किसी कथित गिरोह की मौजूदगी के बारे में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इस मामले में पीड़िताओं के बयानों ने जांच को नई दिशा दी है। एसटीएफ अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि बॉलीवुड की जोड़ियों का उदाहरण देने के पीछे वास्तव में क्या मंशा थी और क्या इसका इस्तेमाल छात्राओं को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने के साधन के रूप में किया गया था।
केजीएमयू का कथित धर्मांतरण प्रकरण अब केवल व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें छात्राओं की सुरक्षा, शैक्षणिक वातावरण और कथित अनुचित धार्मिक दबाव जैसे सवाल भी शामिल हो गए हैं। जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और साक्ष्यों के परीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगा कि पीड़िताओं द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल एसटीएफ और पुलिस की जांच जारी है। इस मामले में किसी भी व्यक्ति को दोषी मानने से पहले आरोपों की कानूनी और तथ्यात्मक पुष्टि जरूरी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही कथित धर्मांतरण गतिविधियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।





