उत्तर प्रदेश

एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए नई पुनर्वास नीति

Kavita2
1 Aug 2026 9:34 AM IST
एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए नई पुनर्वास नीति
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने एसिड अटैक पीड़िताओं के पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए व्यापक सहायता एवं पुनर्वास नीति लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत पीड़िताओं को केवल त्वरित आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, उपचार और आत्मनिर्भरता से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एसिड अटैक की शिकार महिलाओं और युवतियों को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल सके।

मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए एक समग्र पुनर्वास प्रणाली विकसित की जाएगी। इसमें घटना के तुरंत बाद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापना की व्यवस्था भी शामिल होगी। सरकार का मानना है कि ऐसी पीड़िताओं को केवल मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें लंबे समय तक आवश्यक चिकित्सा, शिक्षा और रोजगार से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।

नई नीति के तहत एसिड अटैक पीड़िताओं के संपूर्ण उपचार पर विशेष जोर दिया गया है। गंभीर रूप से घायल महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इन संस्थानों में प्लास्टिक सर्जरी, पुनर्निर्माण सर्जरी, त्वचा उपचार, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और अन्य आवश्यक चिकित्सा सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे पीड़िताओं को बेहतर इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एसिड अटैक पीड़िताओं की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे। यदि किसी छात्रा की पढ़ाई घटना के कारण बाधित होती है, तो उसे आगे की शिक्षा जारी रखने में हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर छात्रवृत्ति, शैक्षणिक सहायता और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं, ताकि पीड़िताएं अपनी शिक्षा पूरी कर आत्मनिर्भर बन सकें।

आर्थिक सहायता भी इस नई नीति का प्रमुख हिस्सा है। एसिड अटैक के बाद कई पीड़िताएं शारीरिक और मानसिक आघात के कारण रोजगार करने में असमर्थ हो जाती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, पुनर्वास के दौरान आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने जैसे उपायों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पीड़िताएं भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

नई नीति में आवास संबंधी सहायता का भी प्रावधान किया गया है। जिन पीड़िताओं को सुरक्षित आवास की आवश्यकता होगी, उन्हें संबंधित सरकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पीड़िता को केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सामाजिक सुरक्षा भी मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि एसिड अटैक केवल शारीरिक हमला नहीं होता, बल्कि इसका गहरा मानसिक और सामाजिक प्रभाव भी पड़ता है। ऐसे मामलों में लंबे समय तक चिकित्सा उपचार, कई चरणों की सर्जरी, मनोवैज्ञानिक परामर्श और सामाजिक पुनर्वास की आवश्यकता होती है। इसलिए सरकार की यह नई नीति बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें पीड़िता के जीवन के हर महत्वपूर्ण पहलू को शामिल करने का प्रयास किया गया है।

महिला अधिकारों से जुड़े सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि नीति का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया, तो इससे एसिड अटैक पीड़िताओं को नई उम्मीद मिलेगी और वे समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगी। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि चिकित्सा सहायता के साथ-साथ कानूनी सहायता और मनोसामाजिक परामर्श की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़ी कई योजनाएं लागू कर चुकी है। अब एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए विशेष पुनर्वास नीति लागू कर सरकार ने इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की है। इससे यह संदेश भी जाता है कि गंभीर अपराधों की शिकार महिलाओं को केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक व्यापक संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

नई नीति लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि एसिड अटैक पीड़िताओं को समय पर आर्थिक सहायता, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवास और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किए जाने से उपचार की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा और विशेषज्ञ सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।

सरकार का यह निर्णय एसिड अटैक पीड़िताओं के पुनर्वास को एक नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। यदि नीति का प्रभावी और पारदर्शी ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है, तो इससे पीड़िताओं को आत्मविश्वास के साथ नया जीवन शुरू करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी और वे समाज में सम्मानपूर्वक अपनी पहचान स्थापित कर सकेंगी।

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