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Moradabad नई राह, एफओएम खाद से मिट्टी और फसल सुधार का ज्ञान मिला

Moradabad मुरादाबाद : तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज में किसानों के लिए विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर), नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी। “किण्वित जैविक खाद (एफओएम) से समृद्ध मृदा, आय वृद्धि एवं पर्यावरण संतुलन” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुरादाबाद मंडल के 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया और कृषि विशेषज्ञों से खेती की नई तकनीकों की जानकारी ली।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान आईसीएआर के वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों और टीएमयू के शिक्षाविदों ने किसानों को जैविक खेती, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और बदलती जलवायु परिस्थितियों में टिकाऊ कृषि के महत्व के बारे में बताया।
आईसीएआर, नई दिल्ली के एग्रोनॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय सिंह राठौर ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए स्वस्थ खेती बेहद जरूरी है। उन्होंने किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए जैविक खादों के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से किसानों की कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है और उत्पादन के साथ आय में भी वृद्धि संभव है।
उन्होंने कहा कि किसानों के पास खेती का व्यावहारिक अनुभव और कई तरह के नवाचार होते हैं। वैज्ञानिक इन अनुभवों को शोध के माध्यम से प्रमाणित कर दूसरे किसानों तक पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने किसानों से पूसा कृषि मेले में भाग लेने की अपील की और कहा कि मुरादाबाद जिले में दो कृषि विज्ञान केंद्र होना किसानों के लिए बड़ी सुविधा है।
आईसीएआर वैज्ञानिक डॉ. ऋषिराज सिंह ने किण्वित जैविक खाद (एफओएम) के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एफओएम में सामान्य जैविक खाद की तुलना में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके इस्तेमाल से मिट्टी का पीएच संतुलित रहता है, लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है और मिट्टी की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
उन्होंने बताया कि एफओएम के नियमित प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों की जरूरत 20 से 30 प्रतिशत तक कम की जा सकती है। इससे किसानों की लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
आईसीएआर वैज्ञानिक डॉ. प्रवीन कुमार उपाध्याय ने कहा कि नई कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों को खेतों तक पहुंचाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी से ही अच्छी फसल, स्वस्थ पशु और बेहतर मानव जीवन संभव है। इसलिए किसानों को जैविक खेती और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना चाहिए।
मुख्य अतिथि एवं उप कृषि निदेशक डॉ. ऋषि कांत सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का आह्वान किया।
कृषि विज्ञान केंद्र, मुरादाबाद के डॉ. मनोज कुमार ने किसानों को कृषि के साथ पशुपालन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों को साथ अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
वहीं डॉ. विश्वेन्द्र सिंह ने किसान सारथी ऐप की उपयोगिता बताते हुए किसानों को उन्नत बीजों के इस्तेमाल की जानकारी दी। उन्होंने गन्ना और धान की फसलों में आने वाले रोगों तथा उनके जैविक नियंत्रण के उपाय भी बताए।
टीएमयू कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज के डीन प्रो. पीके जैन ने किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान और किसानों के अनुभव का मेल कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से ही देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है।
कार्यक्रम में आईसीएआर के वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों, टीएमयू के शिक्षकों और शोधकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। अंत में राष्ट्रगान के साथ गोष्ठी का समापन किया गया।





