उत्तर प्रदेश

जेवर एयरपोर्ट को नया नाम, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पहचान

Rajeshwari Nishad
9 Oct 2026 1:45 PM IST
जेवर एयरपोर्ट को नया नाम, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पहचान
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में स्थित जेवर एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में नामकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जेवर हवाई अड्डे का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने का प्रस्ताव कैबिनेट ने पारित कर दिया है।
अब तक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और जेवर एयरपोर्ट के नाम से पहचानी जाने वाली इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने नया नाम स्वीकार किया है। घोषणा का मुख्य आधार मंत्रिमंडल की मंजूरी है। नामकरण से संबंधित आगे के प्रशासनिक क्रियान्वयन का विस्तृत विवरण शुरुआती जानकारी में सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल स्पष्ट तथ्य यह है कि उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने एयरपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने का निर्णय लिया है और मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा की है।
कैबिनेट का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा है। बैठक में उनकी जनसेवा यात्रा को लेकर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग को प्रदेश की प्रगति से जोड़ा। एयरपोर्ट का नामकरण इसी बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों में शामिल रहा।
जेवर में बने हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष 28 मार्च को किया था। उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इसे विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना बताया था। उन्होंने एयरपोर्ट को युवाओं के भविष्य और क्षेत्र की प्रगति से जोड़ते हुए इसके निर्माण में केंद्र तथा राज्य सरकार के सहयोग का उल्लेख किया था। भारत के प्रधानमंत्री
परियोजना का पहला चरण लगभग 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया गया है। आधिकारिक जानकारी में इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण विमानन प्रवेश द्वार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह हवाई अड्डा सार्वजनिक और निजी भागीदारी के मॉडल पर विकसित हुआ है। इसके निर्माण का उद्देश्य दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में विमानन सुविधाओं का विस्तार करना तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध कराना है। एयरपोर्ट के नामकरण की घोषणा इसी विकसित परियोजना की पहचान से संबंधित नया निर्णय है।
पहले चरण में हवाई अड्डे की सालाना यात्री क्षमता लगभग 1.2 करोड़ निर्धारित की गई है। पूर्ण विकास के बाद इसकी क्षमता बढ़ाकर लगभग सात करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शुरुआती क्षमता और भविष्य की प्रस्तावित क्षमता अलग-अलग हैं। सात करोड़ यात्रियों का आंकड़ा परियोजना के पूर्ण विस्तार से जुड़ा लक्ष्य है। इसे वर्तमान यात्री संख्या या अभी उपलब्ध पूरी क्षमता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विस्तार चरणबद्ध विकास योजना का हिस्सा है।
हवाई अड्डे के संचालक की जानकारी के अनुसार, यहां पहली वाणिज्यिक उड़ानों का स्वागत 15 जून 2026 को किया गया था। मार्च में उद्घाटन के बाद परिचालन की तैयारी से जुड़े परीक्षण और प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इनमें प्रणालियों, कर्मचारियों और यात्रियों से संबंधित व्यवस्थाओं की तैयारी शामिल थी। इस तरह उद्घाटन और वाणिज्यिक परिचालन की शुरुआत अलग-अलग तारीखों पर हुई। अब अक्टूबर में राज्य सरकार की ओर से हवाई अड्डे के नए नाम का प्रस्ताव मंजूर किए जाने की घोषणा सामने आई है।
यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश तथा दुनिया के विभिन्न शहरों से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। संचालक ने पहले चरण को यात्री सेवा, परिचालन दक्षता, डिजिटल सुविधाओं और स्थिरता पर केंद्रित विमानन केंद्र बताया है। एयरपोर्ट का आईएटीए कोड डीएक्सएन है। यात्रियों के लिए हवाई अड्डे की पहचान उसके स्थान, उड़ान संबंधी जानकारी और एयरपोर्ट कोड से भी जुड़ी रहती है। नामकरण की घोषणा के साथ फिलहाल उड़ानों या इस कोड में किसी बदलाव की जानकारी सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रदेश के विकास और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया। बैठक में कुल 39 प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी गई है। एयरपोर्ट का नया नाम रखने का निर्णय उनमें प्रमुख रहा। सरकार ने इसे प्रधानमंत्री की जनसेवा यात्रा के सम्मान से जोड़ा है। हालांकि, नामकरण के फैसले के आधार पर यात्रियों की संख्या, किराये या नई उड़ानों के बारे में कोई अतिरिक्त निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इन विषयों की जानकारी अलग घोषणाओं से स्पष्ट होगी।
जेवर एयरपोर्ट से जुड़े घटनाक्रम में अब नामकरण का नया अध्याय जुड़ गया है। पहले चरण के उद्घाटन और वाणिज्यिक परिचालन की शुरुआत के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने इसे ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ नाम देने की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, हवाई अड्डे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहचान देने का निर्णय लिया गया है। संबंधित प्रशासनिक आदेश और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी सामने आने पर नए नाम के औपचारिक इस्तेमाल की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
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