उत्तर प्रदेश

गन्ना किसानों के लिए नई सुविधा, मशीन से होगी फसल की कटाई, समय पर भुगतान की तैयारी

Kavita2
28 Oct 2026 4:01 PM IST
गन्ना किसानों के लिए नई सुविधा, मशीन से होगी फसल की कटाई, समय पर भुगतान की तैयारी
x

अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अकबरपुर चीनी मिल मिझौड़ा में आगामी 15 नवंबर 2026 से नए पेराई सत्र की शुरुआत होगी। इसके लिए चीनी मिल प्रशासन और गन्ना विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। किसानों को गन्ना आपूर्ति में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पेराई शुरू होने से लगभग एक सप्ताह पहले पर्चियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इस बार जिले में पहली बार केन हार्वेस्टर मशीन से गन्ने की कटाई भी कराई जाएगी। इससे किसानों को समय और श्रम की बचत होने की उम्मीद है। जिले में लगभग 29,572 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। चीनी मिल के एजीएम कैलाश चौधरी के अनुसार, 15 नवंबर से पेराई शुरू करने की तैयारी है और गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने की योजना बनाई गई है। नई फसल से चीनी का उत्पादन बढ़ने पर बाजार में कीमतें कम होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

15 नवंबर से शुरू होगा नया पेराई सत्र

अकबरपुर चीनी मिल मिझौड़ा में गन्ने की पेराई शुरू करने की तारीख तय कर दी गई है।

चीनी मिल के अधिकारियों के अनुसार, 15 नवंबर से पेराई कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

इसके लिए मिल परिसर में आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसानों को गन्ना आपूर्ति की पर्चियां जारी की जाएंगी।

इन पर्चियों के आधार पर किसान निर्धारित समय पर अपना गन्ना मिल तक पहुंचा सकेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मिल में गन्ने की नियमित आपूर्ति बनाए रखना और किसानों को अनावश्यक प्रतीक्षा से बचाना है।

एक सप्ताह पहले किसानों को मिलेंगी पर्चियां

गन्ना किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी पर्ची वितरण को लेकर है।

मिल प्रबंधन के अनुसार, पेराई शुरू होने से लगभग एक सप्ताह पहले किसानों को पर्चियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

इसके लिए सर्वे और सट्टा संबंधी अभिलेखों का उपयोग किया जाएगा।

किसानों को पर्चियां उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश के माध्यम से तथा डाक से भेजने की व्यवस्था बताई गई है।

पर्ची मिलने के बाद किसान अपनी फसल की कटाई और परिवहन की तैयारी कर सकेंगे।

इससे उन्हें निर्धारित समय पर गन्ना मिल पहुंचाने में सुविधा होगी।

पहली बार केन हार्वेस्टर से होगी गन्ने की कटाई

इस पेराई सत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता केन हार्वेस्टर मशीन का उपयोग होगा।

अंबेडकरनगर जिले में पहली बार किसानों को गन्ने की कटाई के लिए यह आधुनिक मशीन उपलब्ध कराई जाएगी।

जिला गन्ना अधिकारी साहब लाल यादव के अनुसार, गन्ना समिति की ओर से एक केन हार्वेस्टर उपलब्ध कराया जाएगा।

किसान बुकिंग के आधार पर इसका उपयोग कर सकेंगे।

मशीन के माध्यम से कम समय में बड़े क्षेत्र की गन्ने की फसल काटी जा सकती है।

इससे कटाई के लिए मजदूरों पर निर्भरता कम होने और समय की बचत होने की संभावना है।

कुछ घंटों में होगी कई एकड़ गन्ने की कटाई

परंपरागत तरीके से गन्ने की कटाई में अधिक समय और श्रम लगता है।

विशेष रूप से बड़े खेतों में किसानों को कटाई के लिए पर्याप्त मजदूरों की जरूरत पड़ती है।

लेकिन केन हार्वेस्टर की सहायता से कई एकड़ खेतों में अपेक्षाकृत कम समय में कटाई संभव हो सकती है।

यह मशीन गन्ने को काटने के साथ कुछ अन्य प्रक्रियाएं भी पूरी कर सकती है।

हालांकि, मशीन की वास्तविक कार्यक्षमता खेत की स्थिति, गन्ने की किस्म और जमीन की बनावट पर निर्भर करेगी।

जिन किसानों के खेत मशीन के उपयोग के अनुकूल होंगे, उन्हें इस तकनीक से अधिक लाभ मिल सकता है।

जिले में 29,572 हेक्टेयर में होती है गन्ने की खेती

अंबेडकरनगर जिले में गन्ना एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 29,572 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की जाती है।

इस खेती से बड़ी संख्या में किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।

गन्ने की बिक्री से किसानों को अपनी घरेलू और कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलती है।

समय पर पेराई शुरू होने से किसानों को फसल बेचने की योजना बनाने में आसानी होगी।

विशेष रूप से जिन किसानों को गन्ने की कटाई के बाद दूसरी फसल की बुवाई करनी है, उनके लिए समय पर आपूर्ति महत्वपूर्ण है।

सात दिन में भुगतान करने का दावा

चीनी मिल प्रशासन ने किसानों को समय पर गन्ना मूल्य भुगतान करने का आश्वासन दिया है।

मिझौड़ा चीनी मिल के एजीएम कैलाश चौधरी ने बताया कि किसानों को गन्ना आपूर्ति के एक सप्ताह के भीतर भुगतान किए जाने की योजना है।

यदि यह व्यवस्था निर्धारित समय पर लागू होती है, तो किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है।

गन्ने का भुगतान मिलने के बाद किसान खाद, बीज और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च कर सकेंगे।

इसके अलावा घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।

हालांकि, सात दिन में भुगतान की बात फिलहाल मिल प्रबंधन का आश्वासन है। वास्तविक भुगतान की स्थिति पेराई सत्र शुरू होने के बाद स्पष्ट होगी।

पर्ची व्यवस्था सुधारने की मांग

पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसानों ने पर्ची वितरण की व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग भी की है।

भीटी क्षेत्र के काही गांव निवासी किसान वीरेंद्र यादव ने बताया कि मिझौड़ा चीनी मिल से किसानों को सुविधा मिलती है।

लेकिन पर्चियां समय पर उपलब्ध होने से गन्ने की बिक्री और अधिक आसान हो सकती है।

उन्होंने कहा कि पर्ची वितरण की व्यवस्था अच्छी होने पर किसान गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।

वहीं, चंदौका के किसान विजय दुबे ने दिसंबर और जनवरी में पर्चियों की समस्या तथा सड़कों पर लगने वाले जाम की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने मिल प्रशासन से इन समस्याओं के समाधान की मांग की है।

गन्ना लदे वाहनों से जाम रोकना भी चुनौती

पेराई सत्र के दौरान बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से गन्ना लेकर मिल पहुंचते हैं।

इससे मिल के आसपास की सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ सकता है।

यदि गन्ना आपूर्ति की पर्चियां व्यवस्थित तरीके से जारी नहीं होतीं, तो एक ही समय पर बड़ी संख्या में वाहन पहुंचने से जाम की स्थिति बन सकती है।

ऐसे में मिल प्रशासन को गन्ना आपूर्ति की समय-सारिणी बेहतर ढंग से तैयार करने की आवश्यकता होगी।

साथ ही किसानों के लिए प्रतीक्षा और तौल की व्यवस्था भी सुचारु रखनी होगी।

चीनी की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद

मिझौड़ा चीनी मिल में पेराई शुरू होने से नई चीनी का उत्पादन बढ़ेगा।

इससे बाजार में आपूर्ति बेहतर होने की संभावना है।

हाल के महीनों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है।

केंद्र सरकार ने भी चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए मिलों को समय पर पेराई शुरू करने की सलाह दी है।

सरकार का उद्देश्य चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अनावश्यक वृद्धि रोकना है।

हालांकि, केवल एक चीनी मिल में उत्पादन शुरू होने से बाजार में कीमतें निश्चित रूप से कम होंगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

चीनी की कीमतों पर देशभर के उत्पादन, मांग, भंडारण और आपूर्ति का प्रभाव पड़ता है।

किसानों को इन बातों का रखना होगा ध्यान

नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसानों के लिए अपने सर्वे और सट्टा संबंधी विवरण की जांच करना महत्वपूर्ण है।

किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गन्ना समिति के अभिलेखों में उनका मोबाइल नंबर सही दर्ज हो।

इससे पर्ची की सूचना समय पर मिलने में सुविधा होगी।

इसके अलावा किसानों को निर्धारित पर्ची के अनुसार ही फसल काटने की योजना बनानी चाहिए।

समय से पहले गन्ना काटने पर परिवहन या आपूर्ति में देरी होने से परेशानी बढ़ सकती है।

केन हार्वेस्टर का उपयोग करने के इच्छुक किसान गन्ना समिति से बुकिंग और उपलब्धता की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

किसानों को नई तकनीक से लाभ मिलने की उम्मीद

अकबरपुर चीनी मिल मिझौड़ा में 15 नवंबर से प्रस्तावित पेराई सत्र इस बार कई बदलावों के साथ शुरू होगा।

एक ओर किसानों को समय पर पर्ची और भुगतान देने का आश्वासन मिला है, वहीं दूसरी ओर पहली बार केन हार्वेस्टर मशीन से गन्ने की कटाई का अवसर मिलेगा।

इस तकनीक से किसानों की मेहनत और कटाई में लगने वाला समय कम हो सकता है।

फिलहाल किसानों की निगाहें पेराई शुरू होने, पर्चियों के समय पर वितरण और गन्ना मूल्य भुगतान पर टिकी हैं।

यदि मिल प्रशासन अपनी घोषित व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करता है, तो नए पेराई सत्र में गन्ना किसानों को महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है।

Next Story