उत्तर प्रदेश

Donation theft मामले में नया सबूत, पुलिस जांच में जुटी

Ratna Netam
3 July 2026 3:19 PM IST
Donation theft  मामले में नया सबूत, पुलिस जांच में जुटी
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Ayodhya अयोध्या : स्थित राम मंदिर से जुड़े दान चोरी मामले में जांच के दौरान नया और अहम घटनाक्रम सामने आया है। जांच एजेंसियों को एक ऐसी तस्वीर मिली है जिसमें आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा मंदिर के नकदी गिनती केंद्र के अंदर दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर मामले में महत्वपूर्ण सबूत मानी जा रही है, क्योंकि इसमें दोनों आरोपी उस स्थान पर मौजूद दिख रहे हैं जहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की गिनती की जाती है।इस मामले में अब तक कुल आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों का फायदा उठाया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, शुरुआती दौर में सीसीटीवी कंट्रोल रूम की निगरानी ठीक से नहीं हो रही थी, जिसका लाभ उठाकर आरोपी कथित तौर पर नकदी निकालने में सफल रहे। फुटेज में उन्हें गणना केंद्र से पैसे लेते हुए भी देखा गया है। बताया जा रहा है कि पहले आरोपी कैमरों से बचने की कोशिश करते थे, लेकिन बाद में निगरानी कमजोर होने के कारण उन्होंने खुलेआम गतिविधियां कीं।जांच में यह भी सामने आया है कि दान गिनती और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में भी कई खामियां थीं। उस समय ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय ने नकदी गिनने वाले कर्मचारियों की भर्ती की जिम्मेदारी ट्रस्टी अनिल मिश्रा को सौंपी थी। अनिल मिश्रा का नाम भी इस मामले में आरोपी के रूप में सामने आया है।

मार्च 2025 में बढ़ते श्रद्धालुओं और दान की मात्रा को देखते हुए 10 नए कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों का इंटरव्यू और नियुक्ति अनिल मिश्रा द्वारा किया गया था। कर्मचारियों को 18,000 रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया और वे सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक काम करते थे।जांच के अनुसार, शुरुआत में कर्मचारियों को कोई आधिकारिक पहचान पत्र नहीं दिया गया था और केवल ड्यूटी शीट के आधार पर प्रवेश दिया जाता था। दान की गिनती दो अलग-अलग स्थानों पर होती थी—एक पीएफसी भवन और दूसरा मंदिर परिसर की पुलिस चौकी में स्थित केंद्र।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पुलिस चौकी में तैनात कर्मचारियों की एक टीम नकदी की छंटाई, बंडलिंग और गिनती का काम देखती थी। यहां पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा समेत कई आरोपी तैनात थे। वहीं कुछ कर्मचारी कार्य छोड़कर चले गए थे, जिसके बाद नए लोगों को शामिल किया गया।मुख्य नकदी गिनती केंद्र में सीसीटीवी निगरानी कक्ष, बैंक काउंटर और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी, जहां एसआईएस और कभी-कभी सीआरपीएफ के जवान तैनात रहते थे। इसके बावजूद जांच में निगरानी व्यवस्था को कमजोर बताया गया है।

जांच में यह भी पाया गया कि सीसीटीवी मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए कर्मचारी अक्सर अपने स्थान पर मौजूद नहीं रहते थे, जिससे पूरी निगरानी प्रक्रिया प्रभावित हुई। वहीं नकदी के साथ-साथ आभूषणों के रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं सामने आई हैं।इस मामले में रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव पर भी गंभीर आरोप हैं, जिन पर दान राशि की निगरानी और बैंक को जमा कराने की जिम्मेदारी थी।फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और निगरानी तंत्र की खामियों को लेकर लगातार पूछताछ जारी है।

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