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उत्तर प्रदेश : सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 लागू कर दी है। नई नियमावली में पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ रिकॉर्ड के संरक्षण, डिजिटल प्रबंधन और प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना देने की समय सीमा, देरी से पंजीकरण की प्रक्रिया, विशेष परिस्थितियों में पंजीकरण और अभिलेखों के रखरखाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया होगी अधिक व्यवस्थित
नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाना है। सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र कई सरकारी और निजी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, इसलिए इनके पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता जरूरी है।
नई व्यवस्था में नागरिकों को पंजीकरण कराने में आसानी होगी और अधिकारियों के स्तर पर भी रिकॉर्ड का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
सूचना देने की समय सीमा तय
नई नियमावली में जन्म और मृत्यु की सूचना देने की समय सीमा को स्पष्ट किया गया है। निर्धारित समय के भीतर सूचना मिलने से प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज होगी और रिकॉर्ड तैयार करने में भी सुविधा होगी।
यदि किसी कारणवश निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना नहीं दी जा पाती है तो विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया का भी प्रावधान किया गया है। इसके लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
चलती ट्रेन, बस, विमान या नाव में जन्म-मृत्यु के लिए भी प्रावधान
नई नियमावली में विशेष परिस्थितियों को भी शामिल किया गया है। अब चलती ट्रेन, बस, विमान या नाव जैसे परिवहन साधनों में जन्म या मृत्यु होने की स्थिति में पंजीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है।
पहले ऐसी परिस्थितियों में लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि घटना स्थल और पंजीकरण स्थान को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती थी। नई व्यवस्था से ऐसी घटनाओं के रिकॉर्ड तैयार करने में आसानी होगी।
जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में सुधार
नियमावली में जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाया गया है। डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से आवेदन, सत्यापन और प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
इससे नागरिकों को प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में कम समय लगेगा और सरकारी रिकॉर्ड भी अधिक सुरक्षित रहेंगे।
जन्म-मृत्यु रजिस्टर होंगे स्थायी अभिलेख
नई नियमावली का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म रजिस्टरों को स्थायी अभिलेख घोषित किया गया है। इन रिकॉर्डों को अब नष्ट नहीं किया जाएगा।
सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि भविष्य में किसी भी समय इन अभिलेखों की आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उपलब्ध कराया जा सके। जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड नागरिकों के व्यक्तिगत दस्तावेजों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और जनगणना संबंधी कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं।
रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी तय
नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रार को जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म से जुड़े अभिलेखों को एक वर्ष तक अपने कार्यालय में सुरक्षित रखना होगा। इसके बाद इन रिकॉर्डों को जिला रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित अभिरक्षा के लिए भेज दिया जाएगा।
इस व्यवस्था से रिकॉर्ड के संरक्षण की जिम्मेदारी अलग-अलग स्तरों पर सुनिश्चित होगी और दस्तावेजों के गुम होने या खराब होने की संभावना कम होगी।
डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान
नई नियमावली में जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से डेटा को सुरक्षित रखने, खोजने और जरूरत के समय उपयोग करने में आसानी होगी।
तकनीक आधारित व्यवस्था से सरकारी विभागों को भी बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। जन्म और मृत्यु के आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
नागरिकों को मिलेगी बेहतर सुविधा
सरकार का कहना है कि नई नियमावली लागू होने से आम लोगों को जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने में अधिक सुविधा मिलेगी। प्रक्रिया के सरल और डिजिटल होने से लोगों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी, जिससे पंजीकरण व्यवस्था में सुधार आएगा।
प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
जन्म और मृत्यु पंजीकरण किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इससे जनसंख्या, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक योजनाओं से जुड़े आंकड़े तैयार किए जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में लागू की गई नई नियमावली से इन आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है। स्थायी रिकॉर्ड और डिजिटल व्यवस्था के कारण भविष्य में सरकारी नीतियां बनाने में भी सहायता मिलेगी।
नई नियमावली के लागू होने के बाद अब जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।





