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बस्ती न्यूज़: पीएम जनऔषधि केंद्रों के संचालन के लगभग पांच साल बाद भी सस्ती दवाओं का लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह दुकान पर दवाओं की रेंज न होना है. जन औषधि केंद्र की दवाएं चिकित्सकों की पसंद भी नहीं बन पाई है. सरकारी अस्पताल के परिसर में औषधि केंद्र मौजूद होने के बाद भी अस्पताल के पर्चे यहां बहुत कम आ रहे हैं.
जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं. अस्पताल के बाहर 24 से ज्यादा दवाएं मौजूद हैं. इन दुकानों पर अस्पताल का पर्चा जाता है. उसी परिसर में जनऔषधि केंद्र का संचालन हो रहा है. यहां पर मात्र तीन चिकित्सकों का गिना-चुना पर्चा ही आ रहा है. औषधि केंद्र पर तैनात स्टॉफ का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि मरीज काफी कम आ रहे हैं. जन औषधि केंद्र की सूची में 500 से ज्यादा दवाएं मौजूद है, लेकिन अधिकतम 180 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हो पा रही हैं. कभी-कभी ऐसा होता है कि जितने एमजी की मांग मरीज करता है, वह दुकान में उपलब्ध नहीं रहती है. जिला महिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक अस्पताल कैली में संचालित औषधि केंद्र में भी दवाओं का रेंज पूरी नहीं होने की समस्या रहती है.
आजमगढ़ और सुल्तानपुर से मंगाई जाती हैं दवाएं
जनऔषधि केंद्र की दवाओं का डिपो आजमगढ़ और सुल्तानपुर जिले में है. बस्ती के लिए दवाएं वहीं से मंगानी पड़ती है. दवाओं की उपलब्धता के लिए लोकल की कोई व्यवस्था नहीं है. आजमगढ़ से दवा आने में तीन से चार दिन लगना सामान्य बात है, जबकि सुल्तानपुर से दवा की आपूर्ति होने में 10 दिन तक का समय लग जाता है. स्थानीय स्तर पर डिपो नहीं होने से दवा की आपूर्ति में समय लग रहा है.





