उत्तर प्रदेश

जनसुविधा केंद्र में लापरवाही, 326 पंचायत सहायकों का वेतन रोका

Kavita2
25 Aug 2026 5:11 PM IST
जनसुविधा केंद्र में लापरवाही, 326 पंचायत सहायकों का वेतन रोका
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रायबरेली। जिले में पंचायत स्तर पर संचालित जनसुविधा केंद्रों की सेवाओं में लापरवाही को लेकर जिला पंचायत राज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जनसुविधा केंद्र की सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने के मामले में 326 पंचायत सहायकों का अगस्त माह का वेतन रोक दिया है। विभाग की इस कार्रवाई के बाद पंचायत सहायकों में खलबली मच गई है और अन्य कर्मचारियों को भी सेवाओं में किसी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत मिलने की उम्मीद है।

शासन की ओर से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग सभी 980 ग्राम पंचायतों में जनसुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र सहित करीब 58 तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

गांव में ही मिल रही हैं कई सरकारी सेवाएं

जनसुविधा केंद्र शुरू होने से ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं के लिए दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर लगाने से काफी राहत मिली है। पहले आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, राशन कार्ड सहित विभिन्न सेवाओं के लिए ग्रामीणों को अपने गांव से बाहर जाना पड़ता था। कई मामलों में उन्हें ब्लॉक या जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती थी।

इस प्रक्रिया में ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। खासकर दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए यह बड़ी परेशानी थी। जनसुविधा केंद्र शुरू होने के बाद इन सेवाओं को पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई, ताकि ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक ही सुविधाएं मिल सकें।

सेवा न देने पर वेतन पर कार्रवाई

विभाग की ओर से पंचायत सहायकों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे जनसुविधा केंद्र का संचालन सुनिश्चित करें और ग्रामीणों को निर्धारित सेवाएं उपलब्ध कराएं। लेकिन जांच के दौरान बड़ी संख्या में पंचायत सहायकों द्वारा सेवा उपलब्ध कराने में लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई की।

जिला पंचायत राज अधिकारी ने 326 पंचायत सहायकों का अगस्त महीने का वेतन रोकने का निर्णय लिया है। विभाग की इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों का संदेश स्पष्ट है कि जनसुविधा केंद्र केवल कागजों पर संचालित नहीं होने चाहिए, बल्कि ग्रामीणों को वास्तविक रूप से सेवाओं का लाभ मिलना चाहिए।

अन्य पंचायत सहायकों में भी खलबली

326 पंचायत सहायकों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद अन्य पंचायत सहायकों में भी खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि विभाग अब जनसुविधा केंद्रों के संचालन और वहां उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की निगरानी को और गंभीरता से लेगा।

पंचायत सहायकों के लिए जनसुविधा केंद्र ग्रामीणों और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में इन केंद्रों पर आने वाले लोगों को समय से सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है।

विभागीय कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर कर्मचारियों के बीच यह संदेश गया है कि सेवाओं में लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

58 सेवाओं का मिलता है लाभ

ग्राम पंचायतों में स्थापित जनसुविधा केंद्रों के जरिए ग्रामीणों को करीब 58 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इनमें आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र के साथ राशन कार्ड से जुड़ी सेवाएं भी शामिल हैं।

इन सेवाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को अब पहले की तरह दूर स्थित कार्यालयों तक जाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुविधा मिलती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का विस्तार होने से आवेदन प्रक्रिया भी आसान हुई है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ तभी संभव है, जब संबंधित केंद्र नियमित रूप से संचालित हों और वहां जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद रहें।

ग्रामीणों को मिलती है समय और धन की बचत

जनसुविधा केंद्रों की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि ग्रामीणों को छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं के लिए कई किलोमीटर की यात्रा नहीं करनी पड़ती। पहले किसी प्रमाणपत्र या दस्तावेज से जुड़े आवेदन के लिए ग्रामीणों को गांव से दूर जाना पड़ता था।

कई बार आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें एक से अधिक बार संबंधित कार्यालय जाना पड़ता था। इससे मजदूरी करने वाले लोगों की आय प्रभावित होती थी और यात्रा पर भी खर्च होता था। गांव में ही सुविधा मिलने से इस परेशानी में कमी आई है।

व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर

विभाग की कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि शासन की ओर से पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जनसुविधा केंद्रों का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब ग्रामीणों को निर्धारित सेवाएं नियमित और समय पर मिलें।

326 पंचायत सहायकों का अगस्त माह का वेतन रोकना इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। इससे पंचायत सहायकों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक गंभीर होने का संदेश गया है।

आगे और सख्ती के संकेत

विभागीय कार्रवाई के बाद यह भी संभावना जताई जा रही है कि जनसुविधा केंद्रों के संचालन की नियमित निगरानी की जाएगी। यदि किसी पंचायत में केंद्र बंद पाया जाता है या ग्रामीणों को निर्धारित सेवाएं नहीं मिलती हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

जिला पंचायत राज अधिकारी की इस कार्रवाई ने पंचायत स्तर पर सेवा व्यवस्था को लेकर सख्ती का संकेत दिया है। 980 ग्राम पंचायतों में संचालित जनसुविधा केंद्रों के जरिए ग्रामीणों को करीब 58 सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। ऐसे में 326 पंचायत सहायकों का वेतन रोकने की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सेवाओं में लापरवाही पर अंकुश लगाकर ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उनके गांव में ही उपलब्ध कराना है।

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