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NCR Loni: भारतीय किसान यूनियन ने महापंचायत का आयोजन किया
लोनी: मंडोला आवास विकास के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे मंडोला समेत छह गांव के किसानों के समर्थन में रविवार को भारतीय किसान यूनियन ने महापंचायत का आयोजन किया। महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत पदाधिकारियों के साथ पहुंचे। राकेश टिकैत ने चेतावनी देते हुए कहा कि आवास विकास अगर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं करता है तो मंडोला आवास विकास में कार्यों को रुकवाकर आंदोलन को और तेज व सख्त करना होगा।
राकेश टिकैत ने कहा कि आवास विकास जिन भूखंड का अधिग्रहण कर रहा है उनका बैनामा नहीं कराया जा रहा है। किसानों की खेतीबाड़ी की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। टिकैत ने कहा कि लोनी और नोएडा में धरने पर बैठे किसानों की कमेटी बनानी पड़ेगी। नोएडा वाले किसानों को मंडोला भेंजे, जब भी किसानों की वार्ता होगी। इस मामले में प्रशासन और सरकार किसानों से बातचीत करें। सरकार और अधिकारी इन किसानों की समस्या का समाधान करें। नहीं तो मंडोला आवास विकास में कार्यों को रुकवाना पड़ेगा। साथ ही यह आंदोलन और सख्त होगा और महापंचायत होगी। कहा कि मंडोला समेत सभी गांव के किसानों की मदद के लिए भारतीय किसान यूनियन साथ खड़ा है। बागपत, मुजफ्फरनगर, नोएडा के किसान भी उनकी मदद के लिए आएगें। अगर किसानों को मुआवजा नहीं देंगे, तो विकास कार्य भी नहीं होने देंगे। कहा कि पंजाब में धरने पर बैठे किसानों की बातचीत चल रही है। इसके लिए 21 मार्च का समय दिया गया है।
बजट में किसानों को जीरो पर लाकर खड़ा कर दिया: राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार धरने को लंबा खींचना चाहती है। उन्होंने यूपी बजट पर कहा कि बजट में किसानों को जीरो पर लाकर खड़ा कर दिया है। किसानों को कोई सुविधा नहीं दी है। सरकार किसानों पर कर्जा बढ़ाने का काम न करे, किसानों की आमदनी बढ़ाने का काम करें।
केएमपी के अंदर होगी पंचायत: मंडोला में हुई पंचायत केएमपी से अंदर है। आगे जो भी दिल्ली के लिए आंदोलन होगा वह इस केएमपी के अंदर ही होगा। दिल्ली के चारों तरफ इस केएमपी के अध्यक्ष चुने जाएंगे। आगे बड़ी लड़ाई की तैयारी हो रही है। दिल्ली अगर घिरेगी तो इस केएमपी से ही घिरेगी। उन्होंने गन्ना भुगतान के बारे में कहा कि गन्ना भुगतान सरकार ने नहीं दिया है। कुछ फैक्ट्रियों पर पिछला बहुत बकाया रुका हुआ है। किसानों के साथ धोखा हो रहा है। फसल बोने से पहले दाम तय हो जाने चाहिए। जब तक किसान के पास मिल वाले और सरकार न आए, तब तक फसल को कम कर दो। एक दिन देश में एग्री कलचर हड़ताल भी होगी।





