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251 लीटर गंगाजल लेकर हरिद्वार से मुजफ्फरनगर पहुंचे मुस्लिम युवक शाकिर

मेरठ/मुजफ्फरनगर : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सावन माह से पहले शुरू हुई कांवड़ यात्रा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है। हरिद्वार से लेकर मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ और आसपास के जिलों तक भगवा वस्त्र धारण किए लाखों शिवभक्त "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयकारों के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बीच मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने श्रद्धा के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और इंसानियत का संदेश भी दिया। मेरठ निवासी मुस्लिम युवक शाकिर 251 लीटर गंगाजल लेकर हरिद्वार से मुजफ्फरनगर पहुंचा, जहां लोगों ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया और उसके साथ तस्वीरें एवं सेल्फी लेने की होड़ लग गई।
कांवड़ यात्रा के दौरान शाकिर का यह कदम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। भगवा परिधान में सजे शाकिर श्रद्धालुओं के साथ यात्रा करते हुए पूरे उत्साह से आगे बढ़ते दिखाई दिए। रास्ते में कई स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया और उनकी पहल की सराहना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनके साथ फोटो खिंचवाई और इसे आपसी भाईचारे की मिसाल बताया।
शाकिर मेरठ के रहने वाले हैं और यह दूसरी बार है जब उन्होंने कांवड़ उठाकर हरिद्वार से गंगाजल लाने का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक पहचान को बदलना नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारा और इंसानियत का संदेश देना है। उनके अनुसार, सभी धर्म लोगों को प्रेम, करुणा और एक-दूसरे के सम्मान की सीख देते हैं और यही भावना उन्हें इस यात्रा के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार से 251 लीटर गंगाजल लेकर यात्रा करना आसान नहीं था। भारी कांवड़ के साथ लंबी दूरी तय करने के लिए शारीरिक क्षमता, अनुशासन और धैर्य की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद उन्होंने पूरे उत्साह के साथ यात्रा पूरी की और इसे आध्यात्मिक अनुभव बताया। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान उन्हें विभिन्न समुदायों के लोगों से सहयोग और सम्मान मिला।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर मौजूद श्रद्धालुओं ने शाकिर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। कई लोगों का कहना था कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना भी भारतीय संस्कृति की पहचान है। श्रद्धालुओं ने कहा कि शाकिर का कदम यह दर्शाता है कि सामाजिक सद्भाव और पारस्परिक सम्मान किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है।
मुजफ्फरनगर पहुंचने पर शाकिर का स्वागत स्थानीय लोगों और कांवड़ियों ने फूल-मालाओं से किया। उनके साथ तस्वीरें लेने वालों की भीड़ लग गई। कई लोगों ने उनके साहस और सकारात्मक सोच की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की पहल समाज में विश्वास और एकता को मजबूत करती है। सोशल मीडिया पर भी उनकी यात्रा से जुड़े फोटो और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लाकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा, चिकित्सा, यातायात और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की जाती है ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उदाहरण भारतीय समाज की साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं। देश की विविधता में एकता की भावना तब और सशक्त होती है जब विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे की परंपराओं और भावनाओं का सम्मान करते हुए सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं। शाकिर की पहल को भी इसी दृष्टि से देखा जा रहा है।
हालांकि, सामाजिक और धार्मिक मामलों के जानकार यह भी मानते हैं कि किसी व्यक्ति का यह कदम उसकी व्यक्तिगत आस्था, सोच और सामाजिक संदेश का हिस्सा हो सकता है। इसे किसी समुदाय के सामूहिक दृष्टिकोण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी ऐसे प्रयास संवाद, सम्मान और सद्भाव की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।
फिलहाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा पूरे उत्साह के साथ जारी है और लाखों श्रद्धालु अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बीच मेरठ के शाकिर ने 251 लीटर गंगाजल के साथ अपनी यात्रा पूरी कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि इंसानियत, आपसी सम्मान और भाईचारा समाज को जोड़ने वाली सबसे बड़ी ताकत हैं। उनकी पहल ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया है तथा सामाजिक सौहार्द पर एक सकारात्मक चर्चा को भी जन्म दिया है।





