- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- Old enmity में हत्या...
Old enmity में हत्या का मामला, चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा

Noida नोएडा : गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने वर्ष 2016 में पुरानी रंजिश के चलते युवक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने हत्या के दोषी चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामला थाना दनकौर क्षेत्र के बिलासपुर गांव का है। अदालत ने बिलासपुर निवासी दानिश, अलीम, यामीन और इब्राहिम को युवक जुबैर उर्फ गुड्डू की हत्या का दोषी माना। इसके अलावा दानिश और अलीम को अवैध हथियार रखने के मामले में आयुध अधिनियम के तहत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रोहताश शर्मा के अनुसार, यह घटना 23 नवंबर 2016 की शाम करीब साढ़े छह बजे हुई थी। बिलासपुर गांव निवासी जुबैर उर्फ गुड्डू अपने घर के बाहर खड़ा था। इसी दौरान गांव के ही दानिश, उसका भाई अलीम, यामीन और इब्राहिम वहां पहुंचे। आरोप है कि पुरानी रंजिश को लेकर चारों ने जुबैर के साथ विवाद शुरू कर दिया।
विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने पहले जुबैर के साथ गाली-गलौज की और उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद दानिश और इब्राहिम ने जुबैर को पकड़ लिया, जबकि यामीन और अलीम ने तमंचों से उस पर गोली चला दी। गोली लगने से जुबैर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे तत्काल कैलाश अस्पताल, ग्रेटर नोएडा लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मृतक के चचेरे भाई आबिद की शिकायत पर थाना दनकौर में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। करीब छह-सात महीने पहले भी दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था। पुलिस ने इसी पुरानी रंजिश को हत्या की मुख्य वजह माना।
जांच के दौरान पुलिस ने दानिश और अलीम को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से तमंचे और कारतूस बरामद होने के बाद उनके खिलाफ आयुध अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 16 गवाह पेश किए। हालांकि चार प्रत्यक्षदर्शियों में से तीन गवाह बाद में अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। अदालत ने उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया। इसके बावजूद न्यायालय ने माना कि गवाहों के बयान बदलने से अभियोजन पक्ष के मामले पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा।
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना। विशेष रूप से अवैध हथियारों की बरामदगी और आरोपियों की ओर से हथियार रखने के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज पेश नहीं किया जाना उनके खिलाफ अहम तथ्य साबित हुआ।
सजा सुनाए जाने से पहले बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की थी। बचाव पक्ष ने यामीन और इब्राहिम की उम्र तथा बीमारी का हवाला दिया, जबकि दानिश और अलीम के परिवार की जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कम सजा देने की मांग की गई।
वहीं अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में भय और अशांति का माहौल पैदा करती हैं। ऐसे अपराधों में नरमी बरतने का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत ने चारों दोषियों को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही निर्देश दिया कि यदि दोषी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करते हैं तो उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसले के बाद मृतक पक्ष ने न्यायालय के निर्णय पर संतोष जताया। वहीं पुलिस की प्रभावी पैरवी को भी इस मामले में अहम माना जा रहा है।





