उत्तर प्रदेश

प्रयागराज में रोशन सिंह के नाम पर आंदोलन

Ratna Netam
5 Aug 2026 8:43 PM IST
प्रयागराज में रोशन सिंह के नाम पर आंदोलन
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प्रयागराज : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और काकोरी कांड के प्रमुख नायकों में शामिल अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को उचित सम्मान दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में बुधवार से प्रयागराज में महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के तत्वावधान में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया। धरना दे रहे लोगों की प्रमुख मांग है कि वर्तमान स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय का नाम बदलकर **'अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह अस्पताल'** रखा जाए, ताकि देश के इस महान स्वतंत्रता सेनानी के बलिदान को उचित सम्मान मिल सके।
धरने का नेतृत्व कर रहे महुआ डाबर संग्रहालय के संस्थापक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि देश इस समय आजादी का अमृत काल मना रहा है और काकोरी ट्रेन एक्शन की 100वीं वर्षगांठ भी ऐतिहासिक रूप से मनाई जा रही है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर उन क्रांतिकारियों को सम्मान देना समय की मांग है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि ठाकुर रोशन सिंह को अब तक वह सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसके वे वास्तविक अधिकारी हैं।
डॉ. राना ने कहा कि जिस स्थान पर आज स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय संचालित हो रहा है, वहीं कभी ऐतिहासिक मलाका जेल हुआ करती थी। इसी जेल में 19 दिसंबर 1927 को अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी दी थी। ऐसे में उसी ऐतिहासिक स्थल पर स्थित अस्पताल का नाम उनके नाम पर रखा जाना उनके सर्वोच्च बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
धरना स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि ठाकुर रोशन सिंह केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान के प्रतीक हैं। उनके विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, लेकिन आज भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार हैं।
वक्ताओं ने बताया कि फांसी से पहले ठाकुर रोशन सिंह ने मलाका जेल से जो पत्र लिखे थे, वे आज भी उनके विचारों और देशभक्ति की मिसाल हैं। उनके दुर्लभ चित्र, मुकदमे से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और ऐतिहासिक अभिलेख महुआ डाबर संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए हैं। संग्रहालय वर्षों से इन धरोहरों के माध्यम से नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
धरना दे रहे लोगों ने यह भी याद दिलाया कि 19 दिसंबर 1927 की सुबह जब ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई थी, तब हजारों लोग उनके अंतिम दर्शन और पार्थिव शरीर को लेने के लिए मलाका जेल के बाहर एकत्र हुए थे। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि जनता उन्हें कितना सम्मान और प्रेम देती थी। उस ऐतिहासिक अंतिम यात्रा के कई दुर्लभ चित्र आज भी उपलब्ध हैं, जो उस दौर की जनभावना को दर्शाते हैं।
महुआ डाबर संग्रहालय परिवार का कहना है कि वे कई वर्षों से इस मांग को विभिन्न मंचों और माध्यमों के जरिए सरकार तक पहुंचाते रहे हैं। काकोरी ट्रेन एक्शन के 100 वर्ष पूरे होने के बावजूद यदि ठाकुर रोशन सिंह को उचित सम्मान नहीं मिलता, तो यह स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ न्याय नहीं होगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी होने तक यह अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी रहेगा।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। उन्होंने एक स्वर में कहा कि सरकार को इस ऐतिहासिक मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखकर देश के महान क्रांतिकारी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए। इस दौरान डॉ. शाह आलम राना, डॉ. अवनीश सिंह, प्रियांशु रंजन, निशांत मोदनवाल, हिमांशु सिंह, सम्राट राय, शिवांग त्रिपाठी, रिशुराज आनंद, श्रेयश तोमर, अभिषेक तिवारी, शुभम सिंह सहित अनेक छात्र-युवा और संग्रहालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
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