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ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का चौथा संस्करण मंगलवार शाम संपन्न हो गया। पांच दिन तक चले इस आयोजन में प्रदेश के उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, हस्तशिल्प, रक्षा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और निर्यात से जुड़े उत्पादों को देश-विदेश के खरीदारों और निवेशकों के सामने प्रदर्शित किया गया। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस बार करीब 4,400 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग 6,500 करोड़ रुपये बताई गई है। साथ ही करीब 15,500 करोड़ रुपये के संभावित कारोबारी प्रस्ताव भी सामने आए।
वर्ष 2023 में शुरू किया गया यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो अब प्रदेश के लिए बड़े कारोबारी मंच के रूप में विकसित हो चुका है। इस आयोजन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और उद्योगों को वैश्विक खरीदारों से जोड़ना, निवेश आकर्षित करना और निर्यात के नए अवसर तैयार करना है।
इस बार ट्रेड शो में एमएसएमई और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक औद्योगिक उत्पादों तक को जगह दी गई। आयोजन से पहले ही 2,400 से अधिक प्रदर्शकों और 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी। ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे देशों को भी भागीदारी से जोड़ा गया।
व्यावसायिक आंकड़ों के लिहाज से इस बार का आयोजन पिछले संस्करण से बड़ा रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 में करीब 3,900 समझौता ज्ञापन हुए थे, जबकि 2026 में इनकी संख्या बढ़कर लगभग 4,400 हो गई। MoU का कुल मूल्य भी करीब 2,680 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। संभावित कारोबारी पूछताछ का अनुमान भी पिछले वर्ष के लगभग 12,500 करोड़ रुपये से बढ़कर इस बार करीब 15,500 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
ट्रेड शो के दौरान बड़ी संख्या में बी2बी बैठकें भी हुईं। अंतिम आंकड़ों के अनुसार करीब 41,500 बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकें आयोजित हुईं और आयोजन में लगभग 5.99 लाख लोग पहुंचे। इससे यह मंच केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रहकर खरीदार, निर्माता और निर्यातकों के बीच सीधे कारोबारी संपर्क का माध्यम बनता दिखाई दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से राज्य को बड़े औद्योगिक और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। ट्रेड शो को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बनने वाले पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों को एक ही मंच पर लाकर विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क कराने की कोशिश की गई।
राज्य की कनेक्टिविटी में हुए विस्तार को भी इस मंच की सफलता से जोड़ा जा रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेहतर सड़क और हवाई संपर्क तथा आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाओं से प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को बाजारों तक तेज पहुंच मिलने की उम्मीद है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे नेटवर्क खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र के उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन सुविधाओं से माल ढुलाई का समय कम होने और निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने की संभावना है।
ट्रेड शो का फोकस केवल बड़े उद्योगों पर नहीं रहा। एमएसएमई, छोटे उद्यमियों, हस्तशिल्पियों और स्टार्टअप को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया। कई जिलों के पारंपरिक उत्पादों को विदेशी खरीदारों के सामने प्रस्तुत किया गया।
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना से जुड़े उत्पादों के लिए भी यह आयोजन महत्वपूर्ण रहा। हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, चमड़ा, पीतल, कालीन और अन्य पारंपरिक उत्पादों को नए खरीदारों तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
व्यापारिक बैठकों के दौरान उद्यमियों को निर्यात, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानक, वैश्विक बाजार की मांग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी जानकारी भी मिली। इससे छोटे उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिला।
प्रदेश में उभरते क्षेत्रों को भी इस बार प्रमुखता दी गई। इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों ने उत्तर प्रदेश की बदलती औद्योगिक पहचान को सामने रखा। लखनऊ स्थित ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी जैसी रक्षा परियोजनाओं का भी इस औद्योगिक विस्तार के संदर्भ में उल्लेख किया गया।
ट्रेड शो का उद्घाटन 25 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया था। उद्घाटन के दौरान प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और नोएडा एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं को उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति से जोड़ा गया।
पांच दिन के आयोजन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश और व्यापार से संबंधित बैठकों का आयोजन किया गया। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और खरीदारों ने प्रदेश के उत्पादों, विनिर्माण इकाइयों और निवेश अवसरों की जानकारी ली।
सरकार का फोकस इस आयोजन के जरिए उत्तर प्रदेश को वैश्विक सोर्सिंग हब के रूप में स्थापित करने पर है। यदि ट्रेड शो में हुए समझौते वास्तविक निवेश और उत्पादन इकाइयों में बदलते हैं तो रोजगार और निर्यात दोनों में वृद्धि की संभावना बन सकती है।
इस बार 4,400 MoU और 6,500 करोड़ रुपये के समझौतों का आंकड़ा आयोजन के बढ़ते कारोबारी प्रभाव को दर्शाता है। हालांकि इन समझौतों का वास्तविक आर्थिक असर उनके धरातल पर लागू होने और निवेश में बदलने के बाद ही स्पष्ट होगा।
ट्रेड शो के समापन के बाद अब सरकार और संबंधित विभागों के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी समझौतों और कारोबारी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की होगी। निवेशकों को जमीन, मंजूरी, बिजली, लॉजिस्टिक्स और अन्य सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने पर इन प्रस्तावों की सफलता निर्भर करेगी।
फिलहाल यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण उत्तर प्रदेश के उद्योग और निर्यात को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने वाले बड़े मंच के रूप में सामने आया है। 6,500 करोड़ रुपये के MoU, 15,500 करोड़ रुपये के संभावित कारोबार और हजारों बी2बी बैठकों के साथ यह आयोजन प्रदेश की औद्योगिक और कारोबारी महत्वाकांक्षाओं को नई गति देने की कोशिश के रूप में समाप्त हुआ।





