उत्तर प्रदेश

मानसून की बारिश से नदियों में लौटी रौनक, सूखी मालन और सोनाली में फिर बहने लगा पानी

Kavita2
8 July 2026 5:38 PM IST
मानसून की बारिश से नदियों में लौटी रौनक, सूखी मालन और सोनाली में फिर बहने लगा पानी
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: मानसून की सक्रियता के साथ ही जिले की सूखी पड़ी नदियों में एक बार फिर जीवन लौटने लगा है। लंबे समय से सूखी मालन और सोनाली नदियों की धाराओं में अब पानी बहने लगा है। वहीं, गंगा नदी का जलस्तर भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है और नदी अपने पुराने स्वरूप की ओर लौटती नजर आ रही है।

मानसून की बारिश ने नदियों और जलस्रोतों को राहत दी है। हालांकि, इस समय गंगा में पानी का बहाव पिछले साल की तुलना में कम है, लेकिन लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आने वाले दिनों में जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

गंगा में बढ़ा पानी का प्रवाह

मौजूदा समय में गंगा नदी में करीब 37 हजार क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मात्रा अभी सामान्य से कम है, लेकिन मानसून की शुरुआत को देखते हुए इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

पिछले दिनों तक गंगा में पानी का स्तर काफी कम था। मानसून से पहले नदी में केवल नाममात्र का जल प्रवाह बचा था। एक जुलाई को मानसून की पहली बारिश से पहले गंगा में केवल करीब दो हजार क्यूसेक पानी बह रहा था।

यह स्थिति आमतौर पर मई महीने में देखने को मिलती है, जब गर्मी के कारण नदियों का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है। लेकिन बारिश शुरू होने के बाद गंगा की धारा में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी है।

मालन और सोनाली नदी में लौटी धारा

मानसून से पहले मालन और सोनाली नदियां पूरी तरह सूख चुकी थीं। कई स्थानों पर नदी की जमीन दिखाई देने लगी थी और जल प्रवाह लगभग खत्म हो गया था।

अब पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बारिश का असर इन नदियों पर दिखाई देने लगा है। बारिश का पानी मिलने से दोनों नदियों में फिर से धारा बहने लगी है।

मालन और सोनाली नदियों का पानी आगे जाकर गंगा नदी में मिल जाता है। ऐसे में इन नदियों में पानी बढ़ने से गंगा के जलस्तर में भी धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है।

देर से आया मानसून, लेकिन बारिश से राहत

इस बार जिले में मानसून की एंट्री थोड़ी देर से हुई। हालांकि, मानसून के सक्रिय होने के बाद बादलों ने अच्छी बारिश की है।

बारिश शुरू होते ही नदियों, तालाबों और जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने लगता है। इस बार भी मानसून की पहली बारिश के बाद से नदियों में बदलाव दिखाई देने लगा है।

पहाड़ों पर हो रही बारिश का पानी छोटी नदियों और नालों के माध्यम से बड़ी नदियों तक पहुंच रहा है, जिससे जल प्रवाह में लगातार सुधार हो रहा है।

किसानों और पर्यावरण के लिए राहत

नदियों में पानी लौटने से किसानों और स्थानीय लोगों को भी राहत मिली है। बारिश के मौसम में नदियों का पुनर्जीवित होना कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

जलस्तर बढ़ने से भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद भी बढ़ जाती है। इसके अलावा नदी किनारे के क्षेत्रों में हरियाली और जैव विविधता को भी फायदा मिलता है।

आगे और बढ़ सकता है जलस्तर

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के दौरान अभी और बारिश होने की संभावना है। यदि पहाड़ी और मैदानी इलाकों में अच्छी बारिश जारी रहती है तो गंगा समेत अन्य नदियों में पानी का प्रवाह और बढ़ सकता है।

नदियों में पानी बढ़ने का सिलसिला पूरी तरह बारिश की मात्रा और उसके वितरण पर निर्भर करेगा। फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग नदियों के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

पिछले साल से कम है पानी, लेकिन उम्मीद बढ़ी

हालांकि वर्तमान में गंगा में बह रहा पानी पिछले वर्ष की तुलना में कम बताया जा रहा है, लेकिन मानसून अभी शुरुआती चरण में है। अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे बारिश बढ़ेगी, वैसे-वैसे नदियों में जल प्रवाह भी बढ़ता जाएगा।

बारिश ने सूख चुकी नदियों को नई जिंदगी देनी शुरू कर दी है। मालन और सोनाली की लौटती धारा और गंगा में बढ़ता पानी इस बात का संकेत है कि मानसून ने जिले के जलस्रोतों को फिर से सक्रिय करना शुरू कर दिया है।

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