उत्तर प्रदेश

मोहसिन रजा की वापसी यूपी अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त

Ratna Netam
8 Sept 2026 5:21 PM IST
मोहसिन रजा की वापसी यूपी अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग के गठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने पूर्व मंत्री मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही आयोग के आठ अन्य सदस्यों के नामों का भी ऐलान कर दिया गया है। नई नियुक्तियों के बाद आयोग को नई टीम मिल गई है और अब अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी इन पदाधिकारियों की होगी।
मोहसिन रजा इससे पहले योगी आदित्यनाथ सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज विभाग के राज्य मंत्री रह चुके हैं। सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया था। अब उन्हें राज्य अल्पसंख्यक आयोग की कमान सौंपकर सरकार ने एक अहम जिम्मेदारी दी है।
लंबे समय बाद भरा गया अध्यक्ष पद
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष पद काफी समय से खाली चल रहा था। पूर्व अध्यक्ष अशफाक सैफी का कार्यकाल पूरा होने के बाद यह पद रिक्त था। आयोग में नियुक्तियां नहीं होने को लेकर कई बार सवाल भी उठे थे। अब नई नियुक्तियों के बाद आयोग के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार मोहसिन रजा को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ आठ सदस्यों की नियुक्ति भी की गई है। आयोग में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है, जिससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी महत्व मिला है।
ये आठ सदस्य भी बनाए गए
मोहसिन रजा के साथ आयोग में आठ सदस्यों के नाम भी घोषित किए गए हैं। इनमें संदीप जैन, अंशुमान कुमार सिंह मैसी, हनप्रीत सिंह बेदी, मोहम्मद असलम, परविंदर सिंह, नेहा खान, सैयद सिराज अब्बास रिजवी और रूमाना सिद्दीकी शामिल हैं।
नई टीम में विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों से जुड़े लोगों को जगह दी गई है। सरकार का उद्देश्य आयोग के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मामलों को प्रभावी तरीके से उठाना और उनका समाधान करना है।
मोहसिन रजा को मिली बड़ी जिम्मेदारी
मोहसिन रजा भाजपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में गिने जाते हैं। वर्ष 2017 में योगी सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री बनाया गया था। उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच मजबूत करने और संगठनात्मक स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के प्रयास के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है।
आयोग की क्या होती है भूमिका?
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मामलों की निगरानी करना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को सुझाव देना है।
आयोग शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करता है। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदायों से मिलने वाली शिकायतों पर भी आयोग विचार करता है।
नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती आयोग की सक्रियता बढ़ाना और लोगों तक इसकी पहुंच मजबूत करना होगी। लंबे समय से लंबित मामलों को निपटाने और योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी आयोग पर रहेगी।
नियुक्ति के सियासी मायने
मोहसिन रजा की नियुक्ति को राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अल्पसंख्यक वोट काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में आयोग की कमान एक अनुभवी राजनीतिक चेहरे को देना सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वहीं विपक्ष इस नियुक्ति को किस नजर से देखता है, यह भी आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल सरकार की ओर से इसे प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बताया जा रहा है।
नई टीम के सामने होंगी कई चुनौतियां
अल्पसंख्यक आयोग के सामने समुदाय से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिनमें शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं का लाभ और सामाजिक सुरक्षा प्रमुख हैं। नई टीम को इन सभी क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभानी होगी।
मोहसिन रजा के अनुभव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वह आयोग के कामकाज को गति देंगे। अब देखने वाली बात होगी कि नई टीम किस तरह से अपनी जिम्मेदारियों को निभाती है और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर क्या कदम उठाती है।
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