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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी जल्द ही नई सब-मशीनगन से लैस किए जाएंगे। प्रदेश शासन ने माननीयों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उनके गनर को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने के लिए 5.59 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। गृह विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। इस धनराशि का उपयोग नई सब-मशीनगन की खरीद और सुरक्षाकर्मियों को उपलब्ध कराने में किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के पास उपलब्ध हथियारों को आधुनिक बनाने की दिशा में यह फैसला लिया गया है। मौजूदा सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गनर को नई सब-मशीनगन देने की तैयारी की जा रही है। शासन की ओर से बजट मंजूर होने के बाद अब हथियारों की खरीद से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
गृह विभाग ने नए हथियार खरीदने के लिए कुल 5.59 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी है। आदेश में स्वीकृत धनराशि को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार खर्च करने की बात होने की संभावना है। हालांकि, खरीदी जाने वाली सब-मशीनगन की कंपनी, मॉडल, तकनीकी विशेषताओं और प्रति हथियार कीमत से संबंधित जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। हथियारों की कुल संख्या भी अभी स्पष्ट नहीं है।
नई सब-मशीनगन मिलने के बाद सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात गनर की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। आधुनिक हथियार आकार में अपेक्षाकृत सुविधाजनक और त्वरित प्रतिक्रिया वाली सुरक्षा जिम्मेदारियों के अनुकूल माने जाते हैं। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले स्थानों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और यात्रा के दौरान सुरक्षा में तैनात जवानों को सतर्क रहना पड़ता है। ऐसे में उन्हें आधुनिक और उपयोग के अनुकूल हथियार देना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश के सांसद और विधायक अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों, बैठकों, राजनीतिक दौरों और अपने निर्वाचन क्षेत्रों के भ्रमण में शामिल होते हैं। इस दौरान उनके आसपास बड़ी संख्या में समर्थक और आम लोग मौजूद रहते हैं। सुरक्षा में तैनात गनर की जिम्मेदारी संबंधित जनप्रतिनिधि की सुरक्षा के साथ आसपास की परिस्थितियों पर नजर रखना भी होती है। शासन का नया निर्णय इसी सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
सुरक्षाकर्मियों को नई सब-मशीनगन उपलब्ध कराने से पहले उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। किसी आधुनिक हथियार का सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल तभी संभव है, जब उसे चलाने वाले सुरक्षाकर्मी को उसकी तकनीकी विशेषताओं, रखरखाव और सुरक्षा नियमों की पूरी जानकारी हो। फिलहाल आदेश में प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ा कोई विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
नई सब-मशीनगन का वितरण किन सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात गनर को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, यह भी स्पष्ट होना बाकी है। प्रदेश में जनप्रतिनिधियों को उनकी सुरक्षा श्रेणी और संभावित खतरे के आकलन के अनुसार सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में नए हथियारों का आवंटन भी निर्धारित सुरक्षा जरूरतों और उपलब्ध संख्या के आधार पर किया जा सकता है। इस संबंध में अंतिम व्यवस्था गृह विभाग या संबंधित सुरक्षा इकाई के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होगी।
हथियारों की खरीद के बाद उनके रिकॉर्ड, सुरक्षित भंडारण और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग की होगी। सरकारी सुरक्षा व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले प्रत्येक हथियार का आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाता है। गनर की ड्यूटी बदलने या किसी अन्य स्थान पर तैनाती होने पर हथियारों के आवंटन की प्रक्रिया भी तय नियमों के तहत की जाती है।
शासन के इस निर्णय को माननीयों की सुरक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। समय के साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियों में बदलाव आने के कारण सुरक्षाकर्मियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी माना जाता है। नई सब-मशीनगन मिलने के बाद गनर किसी आपात स्थिति में अधिक प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया दे सकेंगे। हालांकि, हथियारों के वास्तविक इस्तेमाल से पहले प्रशिक्षण और सुरक्षा अभ्यास की भूमिका अहम रहेगी।
गृह विभाग की ओर से वित्तीय स्वीकृति का आदेश जारी होने के बाद अब हथियारों की खरीद संबंधी औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसमें निर्धारित तकनीकी मानकों के आधार पर हथियार का चयन, गुणवत्ता की जांच और उपलब्धता जैसे चरण शामिल हो सकते हैं। खरीद प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और गनर को नई सब-मशीनगन कब से मिलने लगेंगी, इसकी समयसीमा अभी सामने नहीं आई है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुराने हथियारों का क्या होगा, इस संबंध में भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। पुराने हथियारों को वापस जमा कराया जाएगा या आवश्यकता के अनुसार दूसरी इकाइयों को दिया जाएगा, इसका निर्णय संबंधित विभाग करेगा। वहीं, नई मशीनगन के साथ सुरक्षाकर्मियों को अतिरिक्त उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है।
फिलहाल गृह विभाग की ओर से 5.59 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दिए जाने के बाद सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात गनर को आधुनिक हथियार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। नई सब-मशीनगन की संख्या, मॉडल, खरीद प्रक्रिया और वितरण की समयसीमा से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक आदेश या विभाग की अगली सूचना से स्पष्ट होगी।





