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विधायक का रिपोर्ट कार्ड: ओबरा में सड़क-पुल का विस्तार, चुनौतियां बरकरार

सोनभद्र। ओबरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक संजीव कुमार गोंड़ के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड सामने आया है। क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पुल, सड़क, पेयजल और शहरी विकास से जुड़े कई काम हुए हैं, लेकिन दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में आज भी बिजली, संपर्क मार्ग, प्रदूषण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं। विधायक संजीव कुमार गोंड़ वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण राज्य मंत्री भी हैं, ऐसे में क्षेत्र की जनता की उनसे विकास को लेकर उम्मीदें भी अधिक हैं।
ओबरा विधानसभा सोनभद्र जिले का महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। यह इलाका भौगोलिक रूप से काफी विस्तृत है और यहां कई आदिवासी व दूरस्थ गांव आते हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों से यह क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ बना हुआ है। विधायक संजीव कुमार गोंड़ लगातार दूसरी बार यहां से निर्वाचित हुए हैं।
विधायक के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रेणुका और बिजुल नदी पर बने पुलों को माना जा रहा है। इन पुलों के निर्माण से रेणुकापार क्षेत्र के कई गांवों को बड़ी राहत मिली है। पहले बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई गांवों का संपर्क लंबे समय तक प्रभावित रहता था। पुल बनने से लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिली है।
इसके अलावा हर घर नल-जल योजना के तहत रेणुकूट और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार हुआ है। नगर पंचायत रेणुकूट और पिपरी क्षेत्र में सीसी सड़क निर्माण, हाईमास्ट लाइट, प्रवेश द्वार, घर-घर कूड़ा संग्रहण और फोरलेन परियोजना जैसे कार्यों से शहरी इलाकों की तस्वीर में बदलाव देखने को मिला है।
हालांकि विधानसभा क्षेत्र के सभी हिस्सों में विकास की गति समान नहीं रही है। कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में अब भी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। पनारी क्षेत्र के अरंगी-चंचलिया, कर्री-भोड़हार, खाड़र-पलसो, अमरसोता-छत्ताडाड़, फफराकुंड-चलाकी और कैमहापान-मंगरहवा जैसे कई संपर्क मार्ग आज भी निर्माण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बरसात के समय इन क्षेत्रों में लोगों को आवागमन में काफी परेशानी होती है।
ग्राम पंचायत सिंदूर के 200 से अधिक परिवारों के बिजली सुविधा से वंचित होने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर अभी भी कच्चे रास्तों के सहारे जीवन चलाना पड़ रहा है। इसके अलावा दूषित पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए स्वीकृत 24 आरओ प्लांटों में से केवल तीन ही स्थापित हो सके हैं, जिनमें से दो ही वर्तमान में संचालित हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर भी लोगों में चिंता है। ओबरा और आसपास के क्षेत्रों में उद्योग और खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण पर प्रभाव पड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण पर अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
विधायक संजीव कुमार गोंड़ ने कहा कि विधानसभा के समग्र विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुल निर्माण, पेयजल योजना, सड़क, फोरलेन, नगर पंचायतों में विकास कार्य और सफाई व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में काम हुआ है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं को भी प्राथमिकता के आधार पर शासन के सामने रखा गया है और कई परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
वहीं पूर्व सपा प्रत्याशी रवि सिंह गोंड़ बड़कू ने विकास कार्यों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री होने के बावजूद क्षेत्र की कई बड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने डोमरी क्षेत्र में पुल निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े कार्य, पेयजल समस्या और आदिवासी क्षेत्रों की परेशानियों का मुद्दा उठाया।
स्थानीय लोगों की राय भी मिली-जुली रही। कुछ लोगों ने शहरी क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों की सराहना की, जबकि ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली और पानी की समस्याओं को जल्द दूर करने की मांग की। कुल मिलाकर ओबरा विधानसभा में पुल और शहरी विकास के क्षेत्र में प्रगति दिखाई देती है, लेकिन दूरस्थ गांवों तक विकास की पूरी पहुंच बनाना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।





