उत्तर प्रदेश

प्रोटोकॉल को लेकर विधायक और DSP आमने सामने

Ratna Netam
16 Aug 2026 8:53 PM IST
प्रोटोकॉल को लेकर विधायक और DSP आमने सामने
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मथुरा। वृंदावन में हरियाली तीज के अवसर पर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाए गए बैरियर पर भाजपा विधायक के काफिले की दो गाड़ियां रोके जाने को लेकर विवाद हो गया। अलीगढ़ की कोल विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अनिल पाराशर और मौके पर तैनात पुलिस क्षेत्राधिकारी अमित पाठक के बीच तीखी बहस हुई। घटना का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार, भाजपा विधायक अनिल पाराशर शनिवार रात वृंदावन पहुंचे थे। हरियाली तीज के कारण मंदिरों और प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के मद्देनजर शहर में कई स्थानों पर बैरियर लगाकर वाहनों का प्रवेश नियंत्रित किया जा रहा था। विधायक के आने की सूचना स्थानीय प्रशासन को पहले ही दी गई थी और उनकी कार का नंबर संबंधित पुलिसकर्मियों तक भेजा गया था।
बताया गया कि विधायक के काफिले में तीन गाड़ियां थीं। ये गाड़ियां जब सौ शैय्या अस्पताल के पास लगे बैरियर पर पहुंचीं तो वहां तैनात पुलिस क्षेत्राधिकारी अमित पाठक ने आगे चल रही विधायक की गाड़ी को प्रवेश दे दिया। हालांकि काफिले में पीछे चल रही दो अन्य गाड़ियों को रोक लिया गया। इसी बात को लेकर विधायक के समर्थकों और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो बाद में बहस में बदल गई।
पुलिस अधिकारी का कहना था कि उन्हें केवल एक वाहन का नंबर संदेश के माध्यम से मिला था। इसलिए उस वाहन को बैरियर से जाने दिया गया, जबकि दूसरी दो गाड़ियों के बारे में कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं थी। पुलिस का दावा है कि भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बिना सूचना वाले वाहनों को प्रवेश देने में सावधानी बरती जा रही थी।
काफिले की गाड़ियां रोके जाने से विधायक अनिल पाराशर नाराज हो गए। वायरल वीडियो में कथित तौर पर विधायक को पुलिस क्षेत्राधिकारी से तीखे लहजे में बातचीत करते देखा जा रहा है। विधायक के साथ मौजूद लोगों ने भी पुलिस पर मनमानी और तानाशाही करने का आरोप लगाया। विवाद बढ़ता देख मौके पर मौजूद अन्य पुलिस अधिकारी बीच-बचाव करने पहुंचे और दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की।
इस मामले पर सीओ सदर वरुण मिश्रा ने बताया कि वाहनों के प्रवेश को लेकर कुछ समय के लिए विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी। बाद में मामला शांत करा दिया गया और स्थिति सामान्य हो गई। पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि हरियाली तीज के कारण वृंदावन में वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू थी।
वहीं, भाजपा विधायक अनिल पाराशर ने इस घटना को लेकर अपना पक्ष भी रखा है। उन्होंने बताया कि वह वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी महाराज के दर्शन करने के साथ अटाला चुंगी के पास रहने वाले एक रिश्तेदार का हालचाल जानने जा रहे थे। उनके स्टाफ ने बैरियर पर तैनात पुलिसकर्मियों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी।
विधायक के अनुसार, सूचना देने के बावजूद उनकी गाड़ियों को करीब आधे घंटे तक आगे नहीं जाने दिया गया। इस दौरान अन्य पुलिस अधिकारियों और कुछ दूसरे वाहनों को बैरियर से निकलने की अनुमति दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर तैनात क्षेत्राधिकारी ने उनकी समस्या का संज्ञान नहीं लिया, जिसके कारण उन्हें स्वयं गाड़ी से उतरकर अधिकारी के पास जाना पड़ा।
अनिल पाराशर ने दावा किया कि उनकी गाड़ी को दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोका गया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारी से वर्दी और पद की गरिमा का सम्मान करने को कहा था। विधायक ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर घटना का केवल एक पक्ष दिखाने वाला वीडियो प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की शिकायत मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से करने की बात कही है।
फिलहाल पुलिस की ओर से मामले में किसी औपचारिक जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। वायरल वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों के बाद यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।
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