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दिव्या मित्तल के सवाल के बाद जागा मिर्जापुर प्रशासन, लहुरियादह में स्कूल निर्माण शुरू

मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस अधिकारी और मिर्जापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद लहुरियादह गांव में लंबे समय से लंबित उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया है। मंगलवार को दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर इस बात पर सवाल उठाया था कि स्वीकृति और बजट होने के बावजूद तीन साल बाद भी स्कूल का निर्माण क्यों शुरू नहीं हुआ। इसके अगले ही दिन प्रशासन और शिक्षा विभाग सक्रिय हो गए और विद्यालय के लिए तय जमीन पर नापजोख, सीमांकन और नींव की खुदाई शुरू करा दी गई।
मामला मिर्जापुर जिले के हलिया विकासखंड के लहुरियादह गांव का है। यह गांव पहाड़ी और दूरस्थ इलाके में स्थित है। यहां लंबे समय से बच्चों की पढ़ाई पांचवीं कक्षा के बाद प्रभावित हो रही थी, क्योंकि गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय उपलब्ध नहीं था। बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों में जाना पड़ता था। इसी समस्या को देखते हुए गांव के लोगों ने पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के कार्यकाल के दौरान उच्च प्राथमिक विद्यालय की मांग की थी।
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में बताया कि वर्ष 2023 में गांव के निरीक्षण के दौरान एक महिला ने उनसे व्यक्तिगत मदद मांगने के बजाय बच्चों के लिए स्कूल की मांग की थी। उस समय गांव में पानी जैसी बुनियादी समस्या भी थी, लेकिन महिला ने कहा था कि बच्चों की पढ़ाई पांचवीं के बाद रुक जाती है और गांव में आगे की कक्षाओं के लिए स्कूल होना चाहिए। इसके बाद नियमों की जांच कर विद्यालय का प्रस्ताव तैयार कराया गया था।
प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2024 में उच्च प्राथमिक विद्यालय को स्वीकृति मिली। बाद में अगस्त 2025 में निर्माण के लिए धनराशि भी जारी कर दी गई। इसके बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो पाया। यही मुद्दा दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में उठाया और पूछा कि जब नियम, स्वीकृति और पैसा सब मौजूद थे तो तीन साल बाद भी स्कूल क्यों नहीं बना।
वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने हलिया के खंड शिक्षा अधिकारी प्रकाश चंद्र यादव और संबंधित कर्मचारियों को गांव भेजा। टीम ने स्कूल के लिए आवंटित जमीन की पैमाइश और सीमांकन कराया। इसके बाद भवन निर्माण के लिए नींव की खुदाई भी शुरू कर दी गई।
निर्माण कार्य की जिम्मेदारी प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के प्रधानाध्यापक गंगा शंकर ओझा की देखरेख में दी गई है। अधिकारियों के अनुसार उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण लगभग 25 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा। निर्माण शुरू होने के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है, क्योंकि लंबे समय से उनकी यह मांग अधूरी पड़ी थी।
लहुरियादह के लोगों के लिए यह विद्यालय केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि बच्चों की आगे की पढ़ाई से जुड़ी बड़ी जरूरत है। गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि दूसरे गांव के स्कूल तक पहुंचना छोटे बच्चों के लिए आसान नहीं होता। जंगल और पहाड़ी रास्तों से गुजरकर पढ़ाई के लिए जाना कई परिवारों के लिए मुश्किल बना हुआ था। इसी वजह से स्थानीय लोग लंबे समय से गांव में ही उच्च प्राथमिक विद्यालय की मांग कर रहे थे।
दिव्या मित्तल का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया। उन्होंने तीन वर्षों की देरी पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि मामला केवल बजट या मंजूरी का नहीं था, बल्कि काम को जमीन पर उतारने की इच्छाशक्ति का था। उनके सवाल के बाद स्थानीय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और अगले ही दिन निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।
यह घटनाक्रम प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। विद्यालय को स्वीकृति मिलने और धनराशि जारी होने के बावजूद लंबे समय तक काम शुरू न होना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। अब निर्माण शुरू होने के बाद प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि काम तय समय में और गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाए।
लहुरियादह गांव के बच्चों के लिए स्कूल का निर्माण पूरा होने के बाद पांचवीं के बाद की पढ़ाई गांव में ही संभव हो सकेगी। इससे खासकर उन परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके लिए बच्चों को दूर के स्कूल भेजना कठिन था। ग्रामीणों को उम्मीद है कि निर्माण कार्य अब बिना किसी नई देरी के पूरा किया जाएगा।
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर में अपने कार्यकाल के दौरान लहुरियादह समेत दूरस्थ इलाकों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया था। लहुरियादह में पानी पहुंचाने की पहल को लेकर भी वह चर्चा में रही थीं। अब उनके वीडियो के बाद विद्यालय निर्माण शुरू होने से यह गांव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
फिलहाल शिक्षा विभाग ने स्कूल भवन के निर्माण की शुरुआत करा दी है। जमीन का सीमांकन और नींव की खुदाई होने के बाद आगे भवन निर्माण का काम किया जाएगा। लगभग 25 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह उच्च प्राथमिक विद्यालय गांव के बच्चों के लिए शिक्षा की राह आसान कर सकता है।
तीन साल तक लंबित रहने के बाद शुरू हुआ यह निर्माण अब स्थानीय लोगों के लिए उम्मीद लेकर आया है। दिव्या मित्तल द्वारा सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए जाने के बाद जिस तेजी से प्रशासन सक्रिय हुआ, उससे यह मामला सरकारी योजनाओं की निगरानी और समय पर क्रियान्वयन की जरूरत को भी सामने लाता है।





