उत्तर प्रदेश

शपथ-पत्र के बाद भी कराई नाबालिग की शादी, माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज

Kavita2
11 Sept 2026 11:05 AM IST
शपथ-पत्र के बाद भी कराई नाबालिग की शादी, माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज
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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में नाबालिग लड़की की शादी कराने के आरोप में उसके माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के ‘बाल विवाह कोर ग्रुप’ के सदस्य महेंद्र पाठक की शिकायत पर पुलिस ने गुरुवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की। आरोप है कि कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने और शपथ-पत्र लिए जाने के बावजूद माता-पिता ने अपनी 17 साल पांच महीने की बेटी की शादी करा दी।

पुलिस के अनुसार, शिकायत में बताया गया है कि नाबालिग लड़की का विवाह 24 जून 2026 को गोमतगिरी के पास नैनोद रोड स्थित ड्रीम वर्ल्ड रिजॉर्ट में आयोजित किया गया था। शादी के समय लड़की की उम्र 18 वर्ष पूरी नहीं हुई थी। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उसकी आयु 17 साल और पांच महीने बताई गई है। भारतीय कानून के तहत लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में होने वाला विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है।

महेंद्र पाठक ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि परिवार को विवाह से पहले ही लड़की की कम उम्र और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दे दी गई थी। बाल विवाह रोकने से जुड़े अधिकारियों और सदस्यों ने कथित तौर पर परिवार को समझाइश भी दी थी। इसके बाद परिवार से एक शपथ-पत्र जमा कराया गया था। आरोप है कि इसके बावजूद निर्धारित तारीख पर रिजॉर्ट में विवाह समारोह आयोजित कर लड़की की शादी करा दी गई।

मामला सामने आने के बाद लड़की की जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेजों और विवाह समारोह की जानकारी जुटाई गई। प्रारंभिक जांच में लड़की के नाबालिग होने की बात सामने आने पर उसके माता-पिता के खिलाफ शिकायत की गई। इसके आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। अब विवाह में शामिल अन्य लोगों, आयोजन स्थल की बुकिंग और शादी से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा सकती है।

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार, विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय है। निर्धारित उम्र से पहले विवाह कराना कानूनी अपराध है। कानून में बाल विवाह कराने, उसका आयोजन करने, उसमें सहायता देने या उसे प्रोत्साहित करने वालों के खिलाफ सजा और जुर्माने का प्रावधान है। माता-पिता, अभिभावक, रिश्तेदार, विवाह कराने वाले व्यक्ति और आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वालों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है।

हालांकि, किसी भी आरोपी का अपराध अदालत में प्रमाणित होने तक आरोप ही माना जाता है। पुलिस अब शिकायत, आयु प्रमाण-पत्र, विवाह से संबंधित तस्वीरों, वीडियो और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले की जांच करेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि परिवार को विवाह रोकने के लिए किस स्तर पर सूचना या नोटिस दिया गया था और शपथ-पत्र में क्या आश्वासन दिया गया था।

मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि परिवार को कानूनी स्थिति के बारे में पहले से अवगत कराए जाने का दावा किया गया है। यदि जांच में यह दावा सही पाया जाता है, तो शपथ-पत्र के बावजूद विवाह कराने की परिस्थितियों की विस्तृत पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों के सामने सवाल यह भी होगा कि जानकारी मिलने के बाद विवाह समारोह को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका और आयोजन स्थल पर संबंधित विभागों की टीम पहुंची थी या नहीं।

बाल विवाह के मामलों में शिकायत मिलने पर प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को तत्काल हस्तक्षेप करने का अधिकार होता है। कई बार परिजनों को समझाइश देकर विवाह रुकवाया जाता है और उनसे बच्चे के बालिग होने तक शादी नहीं कराने का लिखित आश्वासन लिया जाता है। इसके बाद भी विवाह कराए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाल विवाह का असर लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता और सुरक्षित भविष्य पर पड़ता है। कम उम्र में विवाह होने से पढ़ाई बीच में छूटने, घरेलू जिम्मेदारियों का दबाव बढ़ने और कम उम्र में गर्भधारण जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि सरकार बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता अभियानों के साथ कानूनी कार्रवाई पर भी जोर देती है।

बाल विवाह की आशंका होने पर कोई भी व्यक्ति स्थानीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति या चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दे सकता है। समय रहते मिली जानकारी से विवाह को रोका जा सकता है और नाबालिग को आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को परिस्थितियों के अनुसार गोपनीय भी रखा जा सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर बाल विवाह की रोकथाम से जुड़े निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों के सामने चुनौती केवल शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज करने की नहीं, बल्कि ऐसे विवाह को समारोह से पहले रोकने की भी है। इसके लिए विवाह भवनों, रिजॉर्ट, धर्मगुरुओं, आयोजनकर्ताओं और स्थानीय समुदाय को कानून के प्रति जागरूक करना जरूरी माना जा रहा है।

फिलहाल पुलिस ने लड़की के माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विवाह में मदद करने वाले अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कदम उठाए जा सकते हैं।

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