उत्तर प्रदेश

मंत्री दानिश अंसारी का SIR पर बयान: अखिलेश यादव की घबराहट लोकतंत्र कमजोर करने का संकेत

SHIDDHANT
29 Nov 2025 9:48 PM IST
मंत्री दानिश अंसारी का SIR पर बयान: अखिलेश यादव की घबराहट लोकतंत्र कमजोर करने का संकेत
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: सरकार में मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के SIR (Special Intensive Revision) को लेकर बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है और यदि यही चुनाव आयोग की मंशा है, तो समाजवादी पार्टी को इससे इतनी घबराहट क्यों है। दानिश अंसारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “लोकतंत्र के ढांचे को कमजोर करने की नीयत से समाजवादी पार्टी लगातार काम कर रही है। संविधान की पुस्तक लेकर घूमने वाले नेता यदि इसे पढ़ते तो समझते कि SIR भारत के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसका विरोध करना साफ दिखाता है कि समाजवादी पार्टी हताश है और जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।”
मंत्री ने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता भविष्य में होने वाले चुनावों में संभावित हार की कहानी अभी से लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, “जनता के हित में किए जा रहे सुधारों और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले कदमों का विरोध करना उनके डर और हताशा का प्रतीक है। SIR का मकसद केवल मतदाता सूची को अपडेट करना, डुप्लीकेट नाम हटाना और सही मतदाता तक पहुंच सुनिश्चित करना है। यह किसी का अधिकार छीनने का माध्यम नहीं है। दानिश अंसारी ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि SIR से मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर किया जा रहा है, जिससे हर योग्य नागरिक अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर सके।
मंत्री ने राजनीतिक संदेश भी दिया कि विपक्षी पार्टियां अक्सर अफवाहें फैलाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग की यह पहल लोकतंत्र को और अधिक पारदर्शी बनाएगी। उन्होंने अपील की कि सभी मतदाता अपने फॉर्म समय पर जमा करें और प्रक्रिया में सहयोग करें। दानिश अंसारी ने कहा कि SIR केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के सशक्तिकरण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी द्वारा इस पहल का विरोध करना उनके डर और असफलताओं की शुरुआत है। इस बयान के माध्यम से मंत्री ने साफ किया कि उत्तर प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग की प्राथमिकता निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शिता और मतदाता अधिकार की सुरक्षा है, और किसी भी राजनीतिक दबाव में इस दिशा में रोक नहीं डाली जाएगी।
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