उत्तर प्रदेश

यूपी के 1,565 पीएम श्री स्कूलों में नवंबर में होगा ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम

Kavita2
30 Sept 2026 5:50 PM IST
यूपी के 1,565 पीएम श्री स्कूलों में नवंबर में होगा ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पीएम श्री स्कूल अब केवल पढ़ाई के केंद्र तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें जनभागीदारी और सामुदायिक विकास से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के 1,565 पीएम श्री स्कूलों में नवंबर महीने में ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 46.95 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूल और स्थानीय समुदाय के बीच सीधा संवाद बढ़ाना है। सरकार चाहती है कि अभिभावक, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, स्थानीय लोग और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी व्यक्ति स्कूल की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करें। इससे बच्चों की पढ़ाई, नामांकन और स्कूल में नियमित उपस्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकेगी।

‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ अभियान के तहत स्कूल प्रबंधन समिति, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और अभिभावकों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। यहां विद्यालय की स्थिति, बच्चों की प्रगति, सीखने के स्तर और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा होगी।

कार्यक्रम में विशेष रूप से बच्चों के नामांकन और स्कूल में उनके ठहराव पर ध्यान दिया जाएगा। कई जगह स्कूल में नामांकन के बाद भी बच्चों की नियमित उपस्थिति बड़ी चुनौती बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय समुदाय को जिम्मेदारी से जोड़कर स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति को कम करने का प्रयास किया जाएगा।

इस पहल का एक अहम उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभा को मंच देना भी है। स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान छात्र-छात्राओं को सांस्कृतिक, शैक्षणिक, खेल, कला और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर क्षमता रखते हैं, लेकिन उन्हें उचित मंच नहीं मिल पाता। ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम के जरिए ऐसे बच्चों की पहचान कर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने की योजना है।

कार्यक्रम में अभिभावकों को स्कूल की गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। अक्सर स्कूल और अभिभावकों के बीच नियमित संवाद की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति से जुड़ी समस्याएं समय रहते सामने नहीं आ पातीं।

सरकार का मानना है कि यदि अभिभावक बच्चों की शिक्षा से लगातार जुड़े रहें और स्कूल से संवाद बनाए रखें तो सीखने के परिणाम बेहतर हो सकते हैं।

अभियान के दौरान समग्र शिक्षा से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों और अभिभावकों को दी जाएगी। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि बच्चों की शिक्षा, स्कूल की सुविधाओं और सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से कौन-कौन से कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों को योजनाओं की सही जानकारी मिलने से उनका लाभ अधिक प्रभावी तरीके से बच्चों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में स्कूल प्रबंधन समितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। समितियों को विद्यालय की जरूरतों, बच्चों की समस्याओं और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को लेकर अभिभावकों तथा समुदाय से चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

ग्राम पंचायतों को भी स्कूलों से जोड़ने की तैयारी है। पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और सामुदायिक सहयोग से जुड़े मुद्दों को बेहतर तरीके से उठा सकते हैं।

इसके साथ ही सेवानिवृत्त अधिकारियों और क्षेत्र के अनुभवी लोगों को भी कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इनके अनुभव का उपयोग बच्चों को मार्गदर्शन देने और स्कूल की गतिविधियों को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।

सरकार का प्रयास है कि स्कूल गांव के सामाजिक और शैक्षणिक विकास का केंद्र बने। विद्यालय में केवल बच्चे ही न आएं, बल्कि समुदाय भी उसे अपनी जिम्मेदारी माने।

इसी सोच के तहत ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ को सामुदायिक भागीदारी के कार्यक्रम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

प्रदेश के 1,565 पीएम श्री स्कूलों में इस आयोजन के लिए 46.95 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस राशि का उपयोग कार्यक्रम के आयोजन और उससे जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं में किया जाएगा।

प्रत्येक स्कूल में स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गतिविधियों की योजना बनाई जा सकती है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल गतिविधियां और शैक्षणिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जा सकती हैं।

इससे अभिभावकों को भी यह समझने का अवसर मिलेगा कि बच्चे स्कूल में क्या सीख रहे हैं और किन क्षेत्रों में उनकी रुचि अधिक है।

स्कूलों में ऐसे कार्यक्रम बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद कर सकते हैं। जब उन्हें अपने गांव और अभिभावकों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा तो उनमें आगे बढ़ने की प्रेरणा बढ़ सकती है।

शिक्षा विभाग का जोर इस बात पर रहेगा कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन बनकर न रह जाए, बल्कि इससे स्कूल और गांव के बीच स्थायी साझेदारी विकसित हो।

अभियान के जरिए स्कूलों की समस्याओं की पहचान स्थानीय स्तर पर ही करने और उनके समाधान में समुदाय की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

कई बार स्कूलों में नामांकन, उपस्थिति, साफ-सफाई, संसाधनों की कमी और बच्चों की नियमित पढ़ाई जैसी समस्याएं स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय से हल की जा सकती हैं।

‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ के जरिए इन्हीं मुद्दों पर सामूहिक चर्चा की जाएगी।

पीएम श्री स्कूलों को नई शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप बेहतर सुविधाओं, तकनीक और नवाचार से जोड़ने पर पहले से काम चल रहा है। अब सामुदायिक भागीदारी को इसमें जोड़कर सरकार स्कूलों को गांव के विकास से भी जोड़ना चाहती है।

सरकार का मानना है कि जब गांव के लोग स्कूल की प्रगति को अपनी जिम्मेदारी मानेंगे तो बच्चों की शिक्षा के स्तर में सुधार की संभावना बढ़ेगी।

नवंबर में होने वाला यह मेगा आयोजन इसी दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

फिलहाल प्रदेश के 1,565 पीएम श्री स्कूलों में कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही हैं। स्कूल प्रबंधन समितियों और स्थानीय प्रतिनिधियों को आयोजन में सक्रिय भागीदारी के लिए जोड़ा जाएगा।

सरकार की कोशिश है कि ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ केवल एक दिन का कार्यक्रम न बने, बल्कि स्कूल और समाज के बीच लगातार संवाद की नई शुरुआत साबित हो।

इस पहल से बच्चों की शिक्षा, नियमित उपस्थिति, नामांकन और प्रतिभा विकास के साथ-साथ गांव और विद्यालय के बीच मजबूत साझेदारी विकसित होने की उम्मीद है।

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