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यूपी में औषधीय पौधों की पहल, हर जिले को मिलेगा चरक वन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों में 16 जुलाई को ‘महर्षि चरक औषधि वन’ स्थापित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ाना, औषधीय पौधों का संरक्षण करना और लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा के महत्व के प्रति जागरूक करना है।
यह पहल पौधारोपण महायज्ञ-2026 ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत की जा रही है। इसके माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसे स्थान विकसित किए जाएंगे, जहां विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन पौधों के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्य वन संरक्षक प्रचार-प्रसार अदिति शर्मा ने बताया कि महर्षि चरक की स्मृति में विकसित किए जा रहे इन औषधि वनों में स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल औषधीय पौधों का चयन किया गया है। इनमें तुलसी, नीम, हरड़, बहेड़ा, आंवला, चिरैता, कपूर, मुलेठी और बेल जैसे महत्वपूर्ण पौधे शामिल हैं।
आयुर्वेद में इन पौधों का विशेष महत्व माना जाता है। तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, जबकि नीम का उपयोग कई पारंपरिक उपचारों में किया जाता रहा है। इसी तरह आंवला, हरड़ और बहेड़ा को आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है। इन पौधों के संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों को भी प्राकृतिक चिकित्सा के संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
‘महर्षि चरक औषधि वन’ स्थापित करने का एक उद्देश्य लोगों को प्रकृति और स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझाना भी है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पेड़ों और प्राकृतिक वनस्पतियों की संख्या में कमी आई है। ऐसे में औषधीय पौधों के संरक्षण की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वन विभाग की ओर से इन औषधि वनों के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया गया है। पौधों के रोपण के साथ-साथ उनकी देखभाल और नियमित निगरानी की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि ये वन लंबे समय तक विकसित हो सकें।
अधिकारियों के अनुसार, औषधीय पौधे न केवल पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद करेंगे, बल्कि जैव विविधता को भी बढ़ावा देंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को औषधीय वनस्पतियों की जानकारी मिलेगी और आयुर्वेदिक परंपराओं को नई मजबूती मिलेगी।
महर्षि चरक को आयुर्वेद के महान आचार्यों में से एक माना जाता है। उनके योगदान को याद करते हुए बनाए जा रहे ये औषधि वन स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
प्रदेश सरकार की इस पहल से आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ औषधीय पौधों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार होने की उम्मीद है। सभी जिलों में स्थापित होने वाले ये औषधि वन पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का केंद्र बन सकेंगे।





