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मायावती का बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा बसपा से बाहर

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने गुरुवार को बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री अनंत कुमार मिश्रा ‘अंटू’ को पार्टी से निष्कासित कर दिया। मायावती ने यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में की है। अंटू मिश्रा को बसपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा का करीबी माना जाता रहा है।
मायावती ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के माध्यम से अनंत कुमार मिश्रा ‘अंटू’ के निष्कासन की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बसपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
अनंत कुमार मिश्रा ‘अंटू’ बसपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। वह पार्टी के पुराने नेताओं में शामिल रहे हैं और लंबे समय तक बसपा संगठन से जुड़े रहे। उन्हें सतीश चंद्र मिश्रा के करीबी नेताओं में गिना जाता था। ऐसे में उनके निष्कासन को बसपा की आंतरिक राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
मायावती ने अपने संदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बसपा एक अनुशासित राजनीतिक संगठन है और यहां पार्टी की नीतियों व निर्देशों के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, अंटू मिश्रा पिछले कुछ समय से पार्टी गतिविधियों में सक्रिय नहीं थे। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उनके भाजपा में जाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं। बताया जाता है कि वह लखनऊ में भाजपा में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन उस समय उनका भाजपा में प्रवेश नहीं हो सका था।
इसके बाद भी अंटू मिश्रा अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सक्रिय रहे। वह वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए थे। बताया जा रहा है कि वह महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे।
बसपा से उनके निष्कासन के बाद अब उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक अनंत कुमार मिश्रा ‘अंटू’ की ओर से इस फैसले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती का यह फैसला पार्टी में अनुशासन को लेकर उनकी सख्त नीति को दर्शाता है। इससे पहले भी बसपा प्रमुख कई नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कार्रवाई कर चुकी हैं।
बसपा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से एक प्रमुख दल रही है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में स्पष्ट संदेश देने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में एक वरिष्ठ नेता का निष्कासन राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
मायावती लगातार यह संदेश देती रही हैं कि पार्टी में पद और जिम्मेदारी तभी तक रहेगी, जब तक नेता संगठन की नीतियों और अनुशासन का पालन करेंगे। अंटू मिश्रा पर हुई कार्रवाई को भी इसी नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
अनंत कुमार मिश्रा ‘अंटू’ का राजनीतिक सफर बसपा के साथ काफी लंबा रहा है। वह मायावती सरकार में मंत्री रहे और पार्टी के महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल थे। उनके निष्कासन से बसपा के भीतर नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल बसपा की ओर से जारी इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सभी की नजर अब अंटू मिश्रा के अगले कदम पर है कि वह किस राजनीतिक दल या रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं।





