उत्तर प्रदेश

Mayawati ने संसद सत्र से पहले उठाए महंगाई और राम मंदिर चढ़ावा के मुद्दे

Ratna Netam
19 July 2026 2:33 PM IST
Mayawati  ने संसद सत्र से पहले उठाए महंगाई और राम मंदिर चढ़ावा के मुद्दे
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Lucknow लखनऊ : संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कई अहम मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस बार भी संसद का मॉनसून सत्र हंगामे और बार-बार होने वाले स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा या फिर जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों जैसे महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सार्थक चर्चा होगी।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सात बिंदुओं में एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आम जनता की समस्याओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि देश की जनता इस बार संसद की कार्यवाही पर पैनी नजर रखे हुए है और उम्मीद कर रही है कि जनहित के विषयों को प्राथमिकता मिलेगी।

बसपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, हेराफेरी और गबन के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण ने उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। उनके अनुसार, इस मामले को लेकर लोगों में व्यापक आक्रोश है और वे धर्म का राजनीतिक लाभ लेने वालों से जवाब मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।

मायावती ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की गूंज अब सड़कों से लेकर अदालत तक पहुंच चुकी है और संभावना है कि संसद में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठेगा। उन्होंने कहा कि जनता इस पूरे मामले पर सरकार और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को गंभीरता से देख रही है।

बसपा सुप्रीमो ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल के चुनाव बाद के हालात और वहां कथित हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

इसके अलावा उन्होंने राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाए। मायावती ने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और सरकारों को स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और महिला असुरक्षा जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि आम जनता इन समस्याओं से जूझ रही है, इसलिए संसद में इन विषयों पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मॉनसून सत्र में राजनीतिक टकराव से ऊपर उठकर जनहित से जुड़े मुद्दों पर ठोस बहस होगी।

मायावती ने अंत में कहा कि देश की जनता चाहती है कि संसद सुचारु रूप से चले और उसके माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से भी अपील की कि वे संसद की गरिमा बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करें और जनहित के मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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