उत्तर प्रदेश

आर्थिक विकास के दावों पर मायावती ने उठाए सवाल महंगाई का भी किया जिक्र

Ratna Netam
4 Sept 2026 5:47 PM IST
आर्थिक विकास के दावों पर मायावती ने उठाए सवाल महंगाई का भी किया जिक्र
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लखनऊ : भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सरकार की ओर से जारी किए गए **7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ** के आंकड़ों पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह विकास दर वास्तविक है तो अच्छी बात है, लेकिन अगर ये सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी या किसी तरह के ‘जुगाड़’ का नतीजा है तो यह चिंता का विषय है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश में महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रही जनता यह समझना चाहती है कि आर्थिक विकास के इन आंकड़ों का वास्तविक फायदा आम लोगों तक कितना पहुंचा है।
GDP आंकड़ों पर उठाए सवाल
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि GDP ग्रोथ के आंकड़े अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विकास का असली पैमाना यह होना चाहिए कि इसका असर आम जनता की जिंदगी पर कितना दिखाई देता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है तो गरीब, मजदूर, किसान और बेरोजगार युवाओं की स्थिति में कितना सुधार हुआ है। उनके अनुसार, विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब आम लोगों को रोजगार, बेहतर आय और जीवन स्तर में सुधार महसूस हो।
‘जुगाड़ के आंकड़े’ वाले बयान से गरमाई सियासत
मायावती ने अपने बयान में कहा कि सरकार द्वारा बताए गए विकास दर के आंकड़ों को लेकर देश में बहस चल रही है। उन्होंने कहा कि पहली नजर में अगर ये आंकड़े सही हैं तो यह देश के लिए सकारात्मक खबर है, लेकिन अगर इनमें किसी तरह की हेराफेरी या जुगाड़ शामिल है तो यह गंभीर चिंता की बात होगी।
उनके इस बयान के बाद आर्थिक आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार से GDP वृद्धि के लाभों को लेकर सवाल पूछ रहा है।
आम जनता को फायदा मिलने पर दिया जोर
मायावती ने कहा कि केवल GDP बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि आर्थिक विकास से उनकी जिंदगी बेहतर हो रही है।
उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 7.8 प्रतिशत विकास दर का लाभ जनता तक किस रूप में पहुंचा है और भविष्य में इसका क्या फायदा मिलेगा।
सरकार ने GDP आंकड़ों को बताया सही
GDP के आंकड़ों पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की ओर से सफाई भी दी गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने कहा है कि GDP की गणना प्रक्रिया में कोई कृत्रिम बढ़ोतरी नहीं की गई है और नए तरीके से आंकड़ों को ज्यादा सटीक बनाने की कोशिश की गई है।
सरकार का कहना है कि आर्थिक विकास दर में बढ़ोतरी निवेश, उद्योग, सेवा क्षेत्र और घरेलू मांग में सुधार को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने भी सराहा GDP ग्रोथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि को देश की आर्थिक मजबूती का संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है।
सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि देश की आर्थिक नीतियों और जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
GDP और जमीनी हकीकत पर बहस
आर्थिक विशेषज्ञों के बीच भी GDP आंकड़ों को लेकर चर्चा जारी है। कुछ विशेषज्ञों ने गणना पद्धति और आंकड़ों की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और उसके समर्थक इसे मजबूत आर्थिक प्रदर्शन बता रहे हैं।
आर्थिक विकास को लेकर अक्सर यह बहस होती है कि केवल GDP बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार, आय और सामाजिक विकास में इसका असर भी दिखाई देना चाहिए।
रोजगार और महंगाई पर मायावती का फोकस
मायावती ने GDP के साथ-साथ रोजगार और महंगाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक विकास का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचता तो ऊंची विकास दर का दावा लोगों के लिए ज्यादा मायने नहीं रखता।
उन्होंने सरकार से मांग की कि विकास के आंकड़ों के साथ-साथ यह भी बताया जाए कि आम लोगों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
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