उत्तर प्रदेश

बसपा को मजबूत करने के लिए मायावती ने बनाई नई रणनीति

Ratna Netam
14 Aug 2026 5:26 PM IST
बसपा को मजबूत करने के लिए मायावती ने बनाई नई रणनीति
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लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने ब्राह्मण समाज सहित सभी वर्गों से पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बसपा किसी एक जाति या समुदाय की पार्टी नहीं है, बल्कि उसकी नीति ‘सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय’ पर आधारित है। पार्टी सर्वसमाज के हित, सम्मान और कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आगामी चुनावों में तैयारी और सक्रियता के आधार पर सभी समाजों को उम्मीदवार बनाने में उचित भागीदारी दी जाएगी।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी विस्तृत बयान में पार्टी संगठन, नेताओं के निष्कासन और पिछले चुनावों में बसपा को हुए नुकसान पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बसपा में किसी नेता विशेष के बजाय तन, मन और धन से समर्पित अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाती है। यह परंपरा बसपा संस्थापक कांशीराम ने स्थापित की थी। उनके अनुसार, पार्टी और आंदोलन को मजबूत बनाने में पदाधिकारियों से अधिक मिशनरी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि ब्राह्मण और अन्य समाजों से संबंधित कुछ लोगों को पार्टी से निष्कासित किया गया है या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। कुछ लोग अपने निजी हित के कारण दूसरी पार्टियों में चले गए, जबकि कुछ ने अपने कथित गलत कार्यों से बचने के लिए सत्ताधारी दल का सहारा लिया। मायावती ने आरोप लगाया कि ऐसे नेताओं का पार्टी के प्रति समर्पण उनके कामकाज के आधार पर संदेहपूर्ण और निराशाजनक रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई नेताओं ने बसपा की सरकार के दौरान पार्टी के मुकाबले अपने निजी और पारिवारिक हितों को अधिक महत्व दिया। अपने समाज को बसपा से जोड़ने और संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी मिलने के बावजूद वे निष्क्रिय बने रहे। इसका परिणाम यह हुआ कि संबंधित समाजों के मतदाता अपेक्षित संख्या में बसपा के साथ नहीं जुड़ सके और पिछले कई लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।
मायावती का यह बयान पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद आया है। अंटू मिश्रा को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा का करीबी माना जाता रहा है। निष्कासन के बाद ब्राह्मण समाज को लेकर पार्टी की रणनीति पर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में मायावती ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के पार्टी से बाहर जाने का अर्थ पूरे समाज की भागीदारी समाप्त होना नहीं है।
उन्होंने ब्राह्मण समाज को भरोसा दिलाया कि वह पूरी मजबूती के साथ बसपा से जुड़ा रहे। प्रत्येक चुनाव में उसकी तैयारी, सक्रियता और संगठन के प्रति योगदान के आधार पर उम्मीदवार बनाने में उचित भागीदारी दी जाएगी। बसपा की सरकार बनने पर वर्ष 2007 की तरह ब्राह्मण समाज सहित अन्य सभी वर्गों को पूरा सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलेगा। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने दलित-ब्राह्मण सहित सर्वसमाज के सामाजिक समीकरण के आधार पर उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि लंबे समय से पार्टी के प्रति ईमानदार और निष्ठावान वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में संगठन का पुनर्गठन किया जा रहा है। इसके तहत नए कर्मठ लोगों और खासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार करने का अभियान चल रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि नए और पुराने कार्यकर्ता साफ-सुथरी तथा मिशनरी मानसिकता के साथ आगे आएंगे और अंबेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष को मजबूती प्रदान करेंगे।
मायावती ने दलित समाज को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि सर्वसमाज आधारित बसपा को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में उसे महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने बसपा की नर्सरी को सर्वसमाज के सुंदर गुलदस्ते जैसा बताया। इससे पहले मायावती ने आरोप लगाया था कि ब्राह्मण समाज के बसपा से जुड़ने और उसे चुनाव में भागीदारी दिए जाने से समाजवादी पार्टी विचलित है। उनके ताजा बयान को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सामाजिक समीकरणों को दोबारा मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। मायावती का मूल बयान उनके
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