उत्तर प्रदेश

मायावती ने हल्द्वानी में मंच शुद्धिकरण मामले की निंदा की जातिवादी तत्वों पर कार्रवाई की मांग

Kavita2
14 Aug 2026 11:12 AM IST
मायावती ने हल्द्वानी में मंच शुद्धिकरण मामले की निंदा की जातिवादी तत्वों पर कार्रवाई की मांग
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में मंच के कथित "शुद्धिकरण" को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को निंदनीय और बेहद चिंताजनक बताते हुए राज्य सरकार से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

मायावती ने शुक्रवार को कहा कि हल्द्वानी में जिस मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष और दलित समुदाय से आने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभा को संबोधित किया था, उसके बाद कथित तौर पर मंच का शुद्धिकरण किया गया। उन्होंने इसे सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

बसपा प्रमुख ने कहा कि यह घटना देश के सामने आई है और इससे समाज में मौजूद जातिवादी सोच उजागर होती है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से मांग की कि इस तरह की मानसिकता रखने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मायावती ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और किसी भी व्यक्ति के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों और कार्यक्रमों में इस तरह की सोच का प्रदर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जातिवादी और सामंती मानसिकता वाले लोग आज भी समाज में भेदभाव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां कर रहे हैं। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकारों को केवल बयान देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

हल्द्वानी में हुई इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे सामाजिक भेदभाव से जोड़कर देखा है। वहीं, मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

मायावती ने कहा कि देश में सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने जिस समान समाज का सपना देखा था, उसे पूरा करने के लिए सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।

बसपा प्रमुख ने दलित समाज के सम्मान और अधिकारों को लेकर अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसका अपमान करना या उसके द्वारा उपयोग किए गए स्थान को अशुद्ध बताना संविधान की भावना के विपरीत है।

उन्होंने राज्य सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि ऐसी घटनाओं में तुरंत कार्रवाई हो और पीड़ित समुदाय को न्याय मिले। मायावती ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह के सामाजिक भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

इस मामले ने एक बार फिर जातिगत भेदभाव और सामाजिक समानता को लेकर बहस तेज कर दी है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह दलित समुदाय से आने वाले देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं। उनके कार्यक्रम के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने प्रतिक्रिया दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में समानता और सम्मान का व्यवहार लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। किसी भी समुदाय या व्यक्ति के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार सामाजिक एकता को कमजोर कर सकता है।

फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। मायावती के बयान के बाद उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

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