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Rhetoric, पर भिड़े मायावती-चंद्रशेखर, आजाद ने किया तीखा वार

Meerut मेरठ : मेरठ के चर्चित मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने बसपा प्रमुख मायावती के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना राजनीति नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि पीड़ित परिवार से मिलना केवल राजनीतिक कदम है तो वह भी वहां जाकर परिवार का दर्द समझ सकते हैं।
मेरठ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना लोकतंत्र में हर जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।
बसपा प्रमुख मायावती की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, बल्कि उनके बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ती हैं और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदनशील मामलों में जमीन पर मौजूद रहकर मदद करना ज्यादा जरूरी है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी मांग स्पष्ट है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और जो भी दोषी है, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को भरोसा मिल सके।
दरअसल, इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने चंद्रशेखर आजाद पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोग जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने के लिए सड़क जाम और प्रदर्शन जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। मायावती ने कहा था कि समाज के हितों और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए संवैधानिक और कानूनी रास्तों पर चलना चाहिए।
मायावती के इस बयान के बाद चंद्रशेखर आजाद ने जवाब देते हुए कहा कि अगर किसी को उनके पीड़ित परिवार से मिलने पर आपत्ति है तो वह भी वहां जाकर परिवार का दर्द साझा कर सकता है। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई केवल मंचों और बयानों से नहीं, बल्कि पीड़ितों के साथ खड़े होकर लड़ी जाती है।
दोनों नेताओं के बीच जारी इस बयानबाजी से प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। मेरठ के मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल सक्रिय हैं और लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर बसपा और आजाद समाज पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगे भी जारी रह सकता है।
वहीं, प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठाई जा रही है।





