उत्तर प्रदेश

‘मातृ सेवा’ से बच रही माताओं की जान, UP में बना मॉडल

Kavita2
6 Aug 2026 4:47 PM IST
‘मातृ सेवा’ से बच रही माताओं की जान, UP में बना मॉडल
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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट ‘मातृ सेवा’ अब पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में सामने आ रहा है। गोरखपुर में संचालित इस विशेष पहल का उद्देश्य प्रसव के दौरान अत्यधिक जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं वाले बड़े अस्पतालों तक पहुंचाना है।

इस प्रोजेक्ट के तहत स्वास्थ्य विभाग हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान पर विशेष ध्यान दे रहा है। ऐसी महिलाओं को प्रसव के दौरान संभावित गंभीर जटिलताओं से बचाने के लिए समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। बीते दो महीनों में इस पहल के जरिए पोस्टपार्टम हैमरेज (प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव) से जूझ रही 15 अतिगंभीर महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। ऐसी स्थिति में कुछ ही समय में महिला की हालत गंभीर हो सकती है। इसलिए ‘मातृ सेवा’ प्रोजेक्ट के तहत मरीजों की पहचान, तत्काल रेफरल और विशेषज्ञ इलाज की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

गोरखपुर में शुरू किए गए इस मॉडल में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम और स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों के माध्यम से हाई रिस्क गर्भावस्था वाली महिलाओं की जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें समय रहते उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों में भेजा जाता है।

इस पहल की सफलता का सबसे बड़ा कारण समय पर निर्णय और बेहतर समन्वय को माना जा रहा है। पहले कई मामलों में गंभीर स्थिति बनने के बाद मरीज बड़े अस्पतालों तक पहुंचते थे, जिससे इलाज में देरी हो जाती थी। अब जोखिम वाली महिलाओं को पहले से चिन्हित कर उनकी निगरानी की जा रही है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ‘मातृ सेवा’ प्रोजेक्ट के तहत रेफरल व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से गंभीर मरीजों को बिना देरी किए बड़े अस्पतालों में पहुंचाने के लिए बेहतर तालमेल बनाया गया है।

गोरखपुर में इस मॉडल की सफलता को देखते हुए अब आसपास के जिलों से भी गंभीर गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए यहां भेजा जा रहा है। इससे इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान जोखिम की पहचान, नियमित जांच, समय पर रेफरल और प्रसव के दौरान विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध हो। ‘मातृ सेवा’ इसी दिशा में काम कर रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने पर विशेष जोर दिया है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई योजनाएं और अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

‘मातृ सेवा’ प्रोजेक्ट के तहत प्रसव से जुड़े गंभीर मामलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। चिकित्सकों की टीम हाई रिस्क मामलों में तुरंत हस्तक्षेप कर रही है, जिससे जटिल परिस्थितियों में भी महिलाओं को सुरक्षित उपचार मिल पा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग अब इस मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि गोरखपुर में मिली सफलता के आधार पर इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से राज्य में मातृ मृत्यु दर को और कम किया जा सकता है।

प्रसव के दौरान महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। ‘मातृ सेवा’ प्रोजेक्ट ने यह दिखाया है कि सही समय पर पहचान, त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

गोरखपुर का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन रहा है। आने वाले समय में इस पहल के विस्तार से उत्तर प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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