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गाजियाबाद में विवाहिता की मौत, दहेज प्रताड़ना का आरोप, सुसाइड नोट पर उठे सवाल

गाजियाबाद। वेव सिटी थाना क्षेत्र में मंगलवार रात एक विवाहिता की मौत का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान मुजफ्फरनगर निवासी प्राची तायल के रूप में हुई है। घटना के बाद मायके पक्ष ने पति समेत ससुराल के चार लोगों पर अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित करने और साजिश के तहत हत्या करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर घटनास्थल से मिली डायरी में एक कथित सुसाइड नोट मिला है, जिसमें पति को बेगुनाह बताया गया है। परिवार ने इस नोट की लिखावट पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद पुलिस ने इसे फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार प्राची तायल अपने ससुराल में रह रही थी। मंगलवार रात वह घर में मृत मिली। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
प्राची की मां अंजू तायल ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को शादी के बाद से अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर परेशान किया जा रहा था। उनका कहना है कि ससुराल पक्ष के लोग लगातार दबाव बनाते थे और इसी प्रताड़ना के कारण उनकी बेटी की जान गई।
अंजू तायल ने पति समेत ससुराल के चार लोगों के खिलाफ वेव सिटी थाने में तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सामान्य आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि उनकी बेटी को प्रताड़ित किया गया और फिर उसकी मौत को दूसरी दिशा देने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस ने परिवार की शिकायत को जांच में शामिल कर लिया है। आरोपों की पुष्टि के लिए प्राची के वैवाहिक जीवन, परिवार के बीच संबंधों और पूर्व में हुए विवादों की जानकारी जुटाई जा रही है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु मृतका की डायरी से मिला कथित सुसाइड नोट है। बताया गया है कि डायरी में लिखे नोट में पति को निर्दोष बताया गया है। हालांकि मृतका के मायके पक्ष ने दावा किया है कि वह लिखावट प्राची की नहीं है।
परिवार की आपत्ति के बाद पुलिस ने सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। अब विशेषज्ञ मृतका की पुरानी लिखावट के नमूनों से नोट की लिखावट का मिलान करेंगे। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि नोट वास्तव में प्राची ने लिखा था या नहीं।
पुलिस मृतका की अन्य डायरी, दस्तावेज और हस्ताक्षर के नमूने भी जुटा सकती है। जरूरत पड़ने पर बैंक दस्तावेज, शैक्षणिक रिकॉर्ड या अन्य निजी कागजात से लिखावट का नमूना लिया जाएगा।
फोरेंसिक रिपोर्ट इस मामले में काफी अहम मानी जा रही है। यदि लिखावट प्राची की पाई जाती है तो पुलिस नोट में दर्ज बातों की परिस्थितियों की जांच करेगी। यदि लिखावट मेल नहीं खाती है तो जांच की दिशा बदल सकती है।
मायके पक्ष ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा है कि बेटी काफी समय से मानसिक दबाव में थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्राची ने हाल के दिनों में अपने माता-पिता या किसी परिचित से किसी परेशानी का जिक्र किया था या नहीं।
उसके मोबाइल फोन की भी जांच की जा सकती है। कॉल डिटेल, संदेश और चैट के जरिए यह पता लगाने का प्रयास होगा कि घटना से पहले वह किसके संपर्क में थी और क्या उसने किसी तरह की प्रताड़ना या विवाद की जानकारी साझा की थी।
पुलिस पति और ससुराल के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ कर सकती है। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर दहेज की मांग, घरेलू विवाद और अन्य घटनाओं की जानकारी जुटाई जाएगी।
मृतका की मां ने अपनी शिकायत में चार लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी मामले में महत्वपूर्ण होगी। इससे मौत के समय और शरीर पर किसी अन्य चोट की मौजूदगी जैसी जानकारी मिल सकती है। यदि कोई संदिग्ध तथ्य सामने आता है तो उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा।
घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। मायके पक्ष बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहा है और मामले की निष्पक्ष जांच चाहता है।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर वहां से मिले सामान को भी जांच में शामिल किया है। डायरी और कथित सुसाइड नोट को सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस यह भी देख रही है कि घटना के समय घर में कौन-कौन मौजूद था और सबसे पहले प्राची को किसने देखा। परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
यदि घर या आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो उनके फुटेज की भी जांच की जा सकती है। इससे घटना से पहले और बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
दहेज से जुड़े मामलों में पुलिस आमतौर पर विवाह से संबंधित दस्तावेज, लेनदेन और परिवार के बीच हुए संवाद की भी जांच करती है। इस मामले में भी मायके पक्ष से उपलब्ध साक्ष्य मांगे जा सकते हैं।
मृतका के परिजन यह साबित करने का प्रयास कर रहे हैं कि उनकी बेटी को ससुराल में लगातार परेशान किया जा रहा था। वे पुराने संदेश, फोन कॉल या अन्य सामग्री पुलिस को सौंप सकते हैं।
वहीं कथित सुसाइड नोट में पति को निर्दोष बताए जाने से मामला और उलझ गया है। यही कारण है कि पुलिस केवल नोट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रही है।
फोरेंसिक जांच पूरी होने तक सुसाइड नोट की प्रामाणिकता स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने भी इसे फिलहाल जांच का विषय माना है।
मामले में आगे की कार्रवाई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर की जाएगी। यदि दहेज प्रताड़ना या किसी अन्य अपराध से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं तो उसी अनुसार धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
प्राची की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है। मायके पक्ष का कहना है कि बेटी की मौत की सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल वेव सिटी थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। एक ओर परिवार दहेज प्रताड़ना और हत्या की साजिश का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर मिले कथित सुसाइड नोट में पति को बेगुनाह बताया गया है।
अब पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र यही है कि प्राची की मौत किन परिस्थितियों में हुई और डायरी में मिला नोट वास्तव में उसी ने लिखा था या नहीं। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले की दिशा अधिक स्पष्ट हो सकेगी।





