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Akhilesh's की मुलाकात पर मनोज पांडेय का बड़ा बयान, रामायण के प्रसंग से साधा निशाना

Lucknow लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक गुरुओं से मिलना और उनसे सद्बुद्धि व मार्गदर्शन प्राप्त करना भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में राजनीतिक संदर्भ भी जोड़ते हुए कई सवाल उठाए।
मंत्री मनोज पांडेय ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि देश में अनेक धार्मिक गुरु हैं, जिनके मार्गदर्शन से सनातन धर्म और आस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि संतों और धार्मिक गुरुओं की भूमिका समाज को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण रही है।
अखिलेश यादव की शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज पांडेय ने कहा कि धार्मिक गुरुओं का सम्मान करना हमारी परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संतों के बताए रास्ते पर चलकर ही समाज में नैतिक मूल्यों और आस्था को मजबूती मिलती है।
हालांकि, मंत्री ने अपने बयान में रामायण के प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि जब रावण को माता सीता का हरण करना था, तब उसने साधु का रूप धारण किया था। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए संकेत दिया कि केवल बाहरी रूप या वेश देखकर किसी व्यक्ति के उद्देश्य का आकलन नहीं किया जा सकता।
बता दें कि अखिलेश यादव ने हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों के बीच कई धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद को लेकर भी बयान दिया था और इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
अखिलेश यादव ने कहा था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े चढ़ावे की पारदर्शिता जरूरी है और इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया था कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच सही तरीके से नहीं की जा रही है।
वहीं, राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच लगातार बयानबाजी जारी है। सत्ता पक्ष जहां विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है, वहीं विपक्ष मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
मंत्री मनोज पांडेय के बयान को इसी राजनीतिक बहस के बीच देखा जा रहा है। उन्होंने जहां धार्मिक गुरुओं के सम्मान की बात कही, वहीं अपने बयान के जरिए राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश की। फिलहाल राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।





