उत्तर प्रदेश

जौहर यूनिवर्सिटी भवनों पर कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट पहुंचा प्रबंधन

Saba Naaz
20 July 2026 7:29 PM IST
जौहर यूनिवर्सिटी भवनों पर कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट पहुंचा प्रबंधन
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रामपुर। आजम खान की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 कथित अवैध भवनों को गिराने के आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कानूनी कदम उठाया है। प्रबंधन ने रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) और जिलाधिकारी के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देते हुए मंडलायुक्त आंजनेय कुमार के न्यायालय में अपील दाखिल कर दी है। अब इस मामले में मंडलायुक्त की अदालत में सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, मंडलायुक्त फिलहाल मेरठ में मौजूद थे, जिसके कारण अपील पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। मंडलायुक्त ने बताया कि मंगलवार को याचिका का अवलोकन करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। माना जा रहा है कि सुनवाई शुरू होने तक भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लग सकती है।

जौहर यूनिवर्सिटी में बने 38 भवनों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने आरोप लगाया था कि यूनिवर्सिटी परिसर में कई भवनों का निर्माण बिना मानचित्र स्वीकृति के कराया गया है। आरडीए की ओर से यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि जब इन भवनों का निर्माण हुआ था, तब आरडीए का गठन नहीं हुआ था, इसलिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी।

हालांकि जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। प्रशासन का कहना था कि उस समय जिला पंचायत सक्रिय थी और निर्माण कार्यों के लिए अनुमति लेना जरूरी था। प्रशासन ने यह भी बताया कि यूनिवर्सिटी के दो भवनों के नक्शे जिला पंचायत से स्वीकृत कराए गए थे, जबकि अन्य भवनों के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई।

जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया था। तय तारीख पर यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार प्रशासन के सामने पेश हुए और उन्होंने पहले दिए गए तर्कों को दोहराया। लेकिन प्रशासन जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और इसके बाद 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।

ध्वस्तीकरण आदेश के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अब मंडलायुक्त न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। प्रबंधन का कहना है कि भवनों को अवैध बताने और गिराने का आदेश उचित प्रक्रिया के तहत नहीं दिया गया है। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए निर्माणों पर कार्रवाई करना जरूरी है।

गौरतलब है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के माध्यम से जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी। यूनिवर्सिटी को लेकर पहले भी कई प्रशासनिक और कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं। अब 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का मामला भी न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है।

मंडलायुक्त न्यायालय में होने वाली सुनवाई के बाद ही यह साफ होगा कि ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगती है या प्रशासन की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रबंधन को अदालत के फैसले का इंतजार है, जबकि प्रशासन भी मामले में अपनी तैयारी कर रहा है।

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