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उत्तर प्रदेश
21 साल पुराने हत्याकांड में बड़ा फैसला तीन अभियुक्तों की उम्रकैद रद्द
nidhi
11 Sept 2026 10:09 AM IST

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हत्या केस
मैनपुरी: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से जुड़े करीब 21 साल पुराने हत्या के मामले में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन अभियुक्तों की उम्रकैद की सजा रद कर दी है। निचली अदालत ने तीनों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अभियुक्तों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां मामले के साक्ष्यों और गवाहियों पर दोबारा विचार करने के बाद अदालत ने निचली अदालत के निर्णय को पलट दिया।
मामला करीब दो दशक पुरानी हत्या की वारदात से जुड़ा है। घटना के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच की थी और आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को हत्या के लिए जिम्मेदार बताया था।
निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद निचली अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद अभियुक्तों की ओर से हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर फैसले को चुनौती दी गई। अपील में निचली अदालत के निष्कर्षों और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर सवाल उठाए गए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामले में ऐसी परिस्थितियां और कमियां हैं जिनके कारण दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता।
हाई कोर्ट ने दोबारा परखे साक्ष्य
हाई कोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए मामले से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। आपराधिक मामलों में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए आरोपों का संदेह से परे साबित होना जरूरी होता है। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का आकलन करने के बाद तीनों अभियुक्तों की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का पर्याप्त आधार नहीं पाया और निचली अदालत के फैसले को रद कर दिया।
21 साल बाद आया अहम फैसला
लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहे इस मामले में हाई कोर्ट का फैसला तीनों अभियुक्तों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। करीब 21 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा समाप्त होने से एक बार फिर यह सवाल सामने आया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में साक्ष्यों का सही मूल्यांकन कितना महत्वपूर्ण है। हाई कोर्ट के विस्तृत आदेश में दिए गए कानूनी आधार इस मामले की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि राज्य या अन्य संबंधित पक्ष फैसले से असहमत हैं तो कानून के तहत उच्चतर न्यायिक मंच पर इसे चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद तीनों अभियुक्तों की उम्रकैद की सजा रद हो गई है। यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित या हिरासत में नहीं हैं तो उनकी रिहाई की प्रक्रिया अदालत के आदेश और संबंधित कानूनी औपचारिकताओं के अनुसार होगी।
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