उत्तर प्रदेश

यूपी चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी

Kavita2
8 Oct 2026 9:28 AM IST
यूपी चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रुहेलखंड क्षेत्र के वरिष्ठ नेता और आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भाजपा से अलग होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप किस राजनीतिक दल में शामिल होंगे, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, उनके समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पूर्व सांसद ने भी सपा में शामिल होने की संभावना से साफ इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि समर्थकों और कार्यकर्ताओं से बातचीत करने के बाद आगे की राजनीतिक रणनीति तय करेंगे।

सोशल मीडिया पर पोस्ट के बाद छोड़ी भाजपा

धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा छोड़ने की चर्चा मंगलवार, 6 अक्टूबर को उस समय शुरू हुई, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर 'टाटा-बाय बाय' लिखकर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं।

इसके अगले दिन बुधवार, 7 अक्टूबर को धर्मेंद्र कश्यप ने मीडिया के सामने आकर भाजपा छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उनके इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले रुहेलखंड क्षेत्र में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी नाराजगी

पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुई घटनाओं को प्रमुख कारण बताया है। उनका आरोप है कि चुनाव में पार्टी के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ काम किया था। इसके बावजूद संगठन ने संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें महत्व दिया।

धर्मेंद्र कश्यप का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया, लेकिन उनके विरोध में गतिविधियां करने वालों को संगठन में जिम्मेदारियां दी गईं। इससे वह आहत हैं।

हालांकि, उनके इन आरोपों पर संबंधित भाजपा नेताओं का पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए चुनाव के दौरान भीतरघात होने के आरोपों को पूर्व सांसद का दावा ही माना जाना चाहिए।

लगातार दो बार आंवला से बने सांसद

धर्मेंद्र कश्यप रुहेलखंड क्षेत्र के पुराने राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। इसके बाद वर्ष 2019 में भी वह इसी सीट से सांसद चुने गए।

लगातार दो लोकसभा चुनाव जीतने के कारण क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पहचान बनी। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए आंवला से उम्मीदवार बनाया था।

हालांकि, इस चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बाद से ही उनकी पार्टी संगठन से नाराजगी की चर्चाएं सामने आती रही थीं। अब भाजपा छोड़ने के ऐलान के साथ ये मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

राज्यसभा टिकट को लेकर भी चर्चा

धर्मेंद्र कश्यप का फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है, लेकिन इस सूची में धर्मेंद्र कश्यप का नाम शामिल नहीं था।

राजनीतिक चर्चाओं में राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने को भी उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, धर्मेंद्र कश्यप ने सार्वजनिक रूप से मुख्य रूप से संगठन में विरोधियों को महत्व दिए जाने और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया है।

भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार सहित अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद धर्मेंद्र कश्यप की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई थी।

समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें तेज

भाजपा छोड़ने के बाद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। उनके सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के संपर्क में होने की खबरें भी सामने आई हैं।

जब धर्मेंद्र कश्यप से समाजवादी पार्टी में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने किसी दल में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा भी नहीं की है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक भविष्य को लेकर अंतिम फैसला समर्थकों और कार्यकर्ताओं से बातचीत करने के बाद लिया जाएगा। ऐसे में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह निश्चित रूप से समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं।

पहले भी सपा से रहा है राजनीतिक संबंध

धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर केवल भाजपा तक सीमित नहीं रहा है। वह पहले बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी से भी जुड़े रहे हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिल चुकी है।

वर्ष 2014 में वह समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद भाजपा के टिकट पर लगातार दो बार सांसद बने। अब करीब 12 साल बाद उन्होंने भाजपा से अलग होने का फैसला किया है।

उनके पुराने राजनीतिक संबंधों के कारण सपा में वापसी की चर्चाओं को बल मिल रहा है। हालांकि, इस संबंध में औपचारिक फैसला सामने आना अभी बाकी है।

बेटी कीर्ति कश्यप को लेकर भी चर्चा

धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बताया जा रहा है कि कीर्ति कश्यप आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय हैं।

ऐसे में धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक फैसले का असर उनके परिवार की चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। हालांकि, कीर्ति कश्यप के किसी दल से विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

रुहेलखंड की राजनीति में बढ़ी हलचल

रुहेलखंड क्षेत्र की राजनीति में धर्मेंद्र कश्यप की पहचान कश्यप समाज से जुड़े प्रमुख नेताओं में होती रही है। आंवला लोकसभा क्षेत्र के साथ ही बरेली और आसपास के इलाकों में भी उनकी राजनीतिक सक्रियता रही है।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उनके भाजपा छोड़ने के फैसले के बाद क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, इस घटनाक्रम का चुनावी असर क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी अगली राजनीतिक मंजिल को लेकर स्थिति साफ नहीं की है। उन्होंने समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेने की बात कही है। अब सबकी नजर उनके अगले कदम पर है कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होते हैं या अपनी अलग राजनीतिक रणनीति बनाते हैं।

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