उत्तर प्रदेश

आउटसोर्स कंडक्टरों के कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव

Ratna Netam
15 Sept 2026 8:35 PM IST
आउटसोर्स कंडक्टरों के कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश रोडवेज में आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे कंडक्टरों के लिए बड़ी राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने आउटसोर्स कंडक्टरों को चरणबद्ध तरीके से सीधे निगम के साथ संविदा अनुबंध पर लेने की व्यवस्था आगे बढ़ा दी है। इससे कंडक्टरों और रोडवेज के बीच मौजूद आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका समाप्त होगी और पात्र कर्मचारी सीधे परिवहन निगम के साथ अनुबंध पर काम कर सकेंगे।
प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि परिवहन निगम में अब सेवायोजन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता के साथ सीधे अनुबंध के आधार पर परिचालकों को रखा जाएगा। पहले चरण में इसका लाभ उन कंडक्टरों को मिलेगा जो वर्तमान में आउटसोर्सिंग के माध्यम से रोडवेज में सेवाएं दे रहे हैं।
इस फैसले को रोडवेज में काम कर रहे आउटसोर्स परिचालकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्मचारी संगठन भी लंबे समय से मांग कर रहे थे कि कंडक्टरों को एजेंसी के बजाय सीधे परिवहन निगम से जोड़ा जाए।
पहले आउटसोर्स एजेंसी अब सीधा रोडवेज
मौजूदा व्यवस्था में बड़ी संख्या में परिचालक सेवा प्रदाता एजेंसियों के माध्यम से रोडवेज में काम कर रहे हैं।
ऐसी व्यवस्था में कंडक्टर का सीधा अनुबंध परिवहन निगम के साथ नहीं बल्कि संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से होता है।
अब सरकार और परिवहन निगम ने इसे बदलने का फैसला किया है।
नई व्यवस्था में पात्र कंडक्टर सीधे उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ संविदा अनुबंध करेंगे।
इसका मतलब यह नहीं है कि ये कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारी बन जाएंगे। उन्हें **संविदा परिचालक** के रूप में रखा जाएगा।
इस अंतर को समझना जरूरी है।
नई व्यवस्था आउटसोर्सिंग से सीधे संविदा अनुबंध की है, न कि नियमित सरकारी नौकरी देने की।
सेवायोजन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी
सीधे संविदा पर आने के लिए सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य रहेगा।
यानी वर्तमान में आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे कंडक्टर को केवल पुरानी सेवा के आधार पर स्वतः नया अनुबंध नहीं मिलेगा।
उसे निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता की शर्तों को पूरा करना होगा।
परिवहन निगम की ओर से क्षेत्रीय अधिकारियों को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
किन कंडक्टरों को मिलेगा फायदा?
नई व्यवस्था का लाभ पहले चरण में मौजूदा आउटसोर्स कंडक्टरों को दिया जाएगा।
परिवहन मंत्री के मुताबिक ऐसे कंडक्टर जो वर्तमान में आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं और जिन्हें कदाचार, भ्रष्टाचार या किसी अन्य कारण से एजेंसी को वापस नहीं किया गया है, वे सीधे अनुबंध की व्यवस्था में शामिल हो सकेंगे।
यानी सभी पुराने कर्मचारियों को बिना किसी जांच के स्वतः शामिल करने की बात नहीं है।
कर्मचारी का सेवा रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होगा।
अगर किसी परिचालक के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हुई है जिसके कारण उसे संबंधित एजेंसी को वापस किया गया था तो उसकी स्थिति अलग हो सकती है।
सिक्योरिटी मनी भी करनी होगी जमा
नई व्यवस्था में पात्र आउटसोर्स कंडक्टरों को सीधे निगम के साथ अनुबंध करने के लिए नई प्रतिभूति राशि यानी सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी।
इससे साफ है कि पुराने आउटसोर्सिंग अनुबंध को केवल नाम बदलकर जारी नहीं रखा जाएगा।
परिवहन निगम के साथ नया संविदा संबंध स्थापित किया जाएगा और उसके लिए निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
1 नवंबर से पहला चरण
नई व्यवस्था एक ही दिन पूरे प्रदेश में सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी।
इसे मौजूदा सेवा प्रदाता एजेंसियों के अनुबंध खत्म होने के अनुसार चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
जिन सेवा प्रदाता एजेंसियों की अनुबंध अवधि **31 अक्टूबर 2026** को समाप्त हो रही है, उनके जरिए काम कर रहे पात्र आउटसोर्स कंडक्टरों से **1 नवंबर 2026** से संविदा परिचालक के रूप में काम लिया जाएगा।
यानी इन कर्मचारियों के लिए एजेंसी मॉडल अक्टूबर के अंत तक चलेगा और उसके बाद वे पात्रता पूरी करने पर सीधे रोडवेज से जुड़ेंगे।
दूसरे चरण में 1 फरवरी 2027 से बदलाव
कुछ आउटसोर्सिंग एजेंसियों का अनुबंध 31 जनवरी 2027 तक है।
ऐसी एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे पात्र कंडक्टरों के लिए बदलाव **1 फरवरी 2027** से होगा।
इस तरह मौजूदा अनुबंधों को बीच में खत्म करने के बजाय उनकी अवधि पूरी होने के बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
इससे प्रशासनिक बदलाव के दौरान बस संचालन प्रभावित होने की संभावना भी कम की जा सकेगी।
पुरानी सेवा का क्या होगा?
कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक उनकी पुरानी सेवा को लेकर है।
रिपोर्ट के मुताबिक सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर आने वाले आउटसोर्स कंडक्टरों को निगम में पहले की गई आउटसोर्स सेवा का लाभ नई संविदा सेवा में जोड़कर नहीं दिया जाएगा।
यानी पुरानी आउटसोर्स सेवा को नई संविदा सेवा की वरिष्ठता या अन्य सेवा लाभ के रूप में स्वतः जोड़ने की व्यवस्था नहीं बताई गई है।
हालांकि सीधे अनुबंध पर आने के बाद उन्हें निगम में संविदा परिचालकों के लिए प्रचलित अन्य अनुमन्य सुविधाएं मिलेंगी।
इसलिए खबर में यह लिखना कि पुराने सभी वर्षों की सेवा नई नौकरी में जोड़ दी जाएगी, गलत होगा।
वेतन और बाकी देनदारियों का होगा भुगतान
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन. सिंह के मुताबिक आउटसोर्स से सीधे संविदा व्यवस्था में आने वाले कर्मचारियों के पुराने देयकों को भी निपटाने की तैयारी है।
इसमें वेतन, ईपीएफ, ईएसआई और जीएसटी आदि से संबंधित भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर कराने की बात कही गई है।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एजेंसी से सीधे निगम के अनुबंध में आने के दौरान कर्मचारियों के पुराने भुगतान या सामाजिक सुरक्षा अंशदान लंबित नहीं रहने चाहिए।
क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देश
नई व्यवस्था को जमीन पर लागू करने के लिए सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब अब केवल नीतिगत घोषणा नहीं बल्कि कर्मचारियों के दस्तावेज, पात्रता और अनुबंध से जुड़ी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा प्रदाता एजेंसियों के अनुबंध की समाप्ति की तारीख के अनुसार कर्मचारियों को नई व्यवस्था में लाया जाएगा।
कर्मचारी संघ लंबे समय से कर रहा था मांग
रोडवेज कर्मचारी संगठनों की ओर से सीधे संविदा व्यवस्था की मांग पहले से की जा रही थी।
अगस्त में वाराणसी से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ ने महिला परिचालकों की तरह पुरुष परिचालकों को भी आउटसोर्स व्यवस्था से हटाकर सीधे निगम के अनुबंध पर लेने की मांग उठाई थी।
कर्मचारी संगठन का तर्क था कि परिचालक रोडवेज की आय व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वह यात्रियों से किराया प्राप्त करता है, टिकट जारी करता है और निगम के राजस्व से सीधे जुड़ा होता है।
इसलिए परिचालक की जवाबदेही सीधे निगम के प्रति होनी चाहिए।
रोडवेज के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं कंडक्टर?
उत्तर प्रदेश रोडवेज प्रतिदिन बड़ी संख्या में बसों का संचालन करता है।
कंडक्टर केवल टिकट काटने वाला कर्मचारी नहीं होता।
उसे यात्रियों से किराया लेना, टिकट जारी करना, यात्रियों की संख्या का रिकॉर्ड रखना और निर्धारित नियमों के अनुसार निगम की आय जमा करना होता है।
यात्री और रोडवेज के बीच वह सबसे सीधे संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों में शामिल है।
इसी वजह से परिचालकों की नियुक्ति और जवाबदेही को परिवहन निगम की आय तथा यात्री सेवाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
एजेंसी हटने से क्या बदलेगा?
सीधे अनुबंध की व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव कर्मचारी और निगम के बीच संबंध का होगा।
अभी आउटसोर्स कर्मचारी एजेंसी के जरिए निगम में काम करता है।
नई व्यवस्था में संविदा परिचालक सीधे परिवहन निगम के साथ अनुबंध करेगा।
इससे सेवा की शर्तें, जवाबदेही और निगम की निगरानी ज्यादा प्रत्यक्ष हो सकती है।
कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि इससे एजेंसी व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याएं कम होंगी।
हालांकि वास्तविक फायदा नई संविदा की सेवा शर्तों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
नियमित कर्मचारी नहीं बनेंगे कंडक्टर
इस खबर में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि सीधे रोडवेज से कॉन्ट्रैक्ट होने का अर्थ **नियमितीकरण नहीं है।**
कंडक्टर संविदा आधार पर ही काम करेंगे।
इसलिए “सभी आउटसोर्स कंडक्टर सरकारी कर्मचारी बने” या “कंडक्टरों को स्थायी नौकरी मिली” जैसी हेडलाइन तथ्यात्मक रूप से गलत होगी।
सही बात यह है कि पात्र आउटसोर्स कंडक्टरों को एजेंसी से हटाकर सीधे उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ संविदा अनुबंध पर लाया जा रहा है।
पहले भी बढ़ा था संविदा कर्मियों का मानदेय
उत्तर प्रदेश सरकार ने संविदा चालक और परिचालकों के मानदेय में भी इससे पहले बदलाव किया था।
1 जनवरी 2026 से संविदा चालकों और परिचालकों के भुगतान की प्रति किलोमीटर दर में बढ़ोतरी लागू की गई थी।
अब आउटसोर्स परिचालकों को सीधे निगम के संविदा ढांचे में लाने का फैसला उनके सेवा संबंधों में बड़ा बदलाव है।
इससे संकेत मिलता है कि परिवहन विभाग रोडवेज के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था में चरणबद्ध बदलाव कर रहा है।
दूसरे आउटसोर्स कर्मचारियों से अलग है फैसला
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सितंबर 2025 में व्यापक आउटसोर्सिंग व्यवस्था के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड के गठन को मंजूरी दी थी।
उस व्यवस्था में सरकारी विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए मानदेय, ईपीएफ, ईएसआई और एजेंसी चयन को ज्यादा पारदर्शी बनाने के प्रावधान किए गए थे।
लेकिन रोडवेज कंडक्टरों का मौजूदा फैसला अलग प्रकृति का है।
यहां पात्र आउटसोर्स परिचालकों को सीधे उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के संविदा अनुबंध में लाने की व्यवस्था की जा रही है।
यात्रियों को भी हो सकता है फायदा
नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की सेवा शर्तों में बदलाव तक सीमित नहीं माना जा रहा।
अगर कंडक्टर सीधे निगम के प्रति जवाबदेह होगा तो टिकटिंग, राजस्व और यात्री सेवा पर निगरानी मजबूत हो सकती है।
रोडवेज में बिना टिकट यात्रा, किराया संबंधी शिकायत और यात्रियों से व्यवहार जैसे मुद्दों पर परिचालक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
सीधे संविदा व्यवस्था में निगम कर्मचारियों के प्रदर्शन और अनुशासन पर ज्यादा प्रत्यक्ष नियंत्रण रख सकेगा।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब आगे क्या होगा?
परिवहन निगम के क्षेत्रीय स्तर पर मौजूदा आउटसोर्स कंडक्टरों की पात्रता और रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी।
सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण, नई सिक्योरिटी राशि और निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पात्र कर्मचारियों को सीधे अनुबंध में लिया जाएगा।
पहला बड़ा बदलाव 1 नवंबर 2026 से दिखाई देगा।
इसके बाद दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा।
हजारों कंडक्टरों की नजर नई व्यवस्था पर
उत्तर प्रदेश रोडवेज में लंबे समय से आउटसोर्सिंग और संविदा के जरिए बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसे में परिचालकों को एजेंसी से हटाकर सीधे निगम के संविदा अनुबंध में लाने का फैसला महत्वपूर्ण है।
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पात्र कर्मचारी का संविदात्मक संबंध सीधे परिवहन निगम से स्थापित होगा।
लेकिन पुरानी आउटसोर्स सेवा को नई संविदा सेवा में जोड़कर लाभ देने की व्यवस्था नहीं है और सीधे अनुबंध को स्थायी सरकारी नौकरी भी नहीं माना जाएगा।
फिलहाल रोडवेज ने क्षेत्रीय प्रबंधकों को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दे दिए हैं। जिन एजेंसियों का कॉन्ट्रैक्ट पहले खत्म होगा, उनके कर्मचारियों को पहले चरण में नई व्यवस्था में लाया जाएगा।
इस तरह उत्तर प्रदेश रोडवेज में परिचालकों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है—**एजेंसी के जरिए काम करने वाले पात्र कंडक्टर अब चरणबद्ध तरीके से सीधे रोडवेज के संविदा कंडक्टर बन सकेंगे।**
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